बौद्ध महोत्सव को लेकर कतिपय जानने योग्य बातें

0
9164

 

अंतरराष्ट्रीय बौद्ध महोत्सव एवं शोध संगोष्ठी, सिरपुर 12,13,14 मार्च 2021 को आयोजित एक भव्य आयोजन माना जा सकता है।
इस समारोह में जापान और भारत देश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों ने भाग लिया। अक्सर लोग छत्तीसगढ़ में रायपुर, राजनादगांव, बस्तर, जैसी जगहें ही जानते हैं। सिरपुर बौद्ध क्षेत्र है। तथागत बुद्ध का स्थान। हैरानी की बात है कि इस क्षेत्र को कोई इतना जानता नहीं है। बौद्ध महोत्सव में आने पर इस क्षेत्र को जाना। इस तीन दिवसीय उत्सव में कई नई चीजें मिली। रहने के लिए आवास में कुछ असुविधाएं थीं, रात के 1बजे एक दम सहज सरल सिरपुर निवासी आए और काम पूरा कर के गए। फिर तो सुविधा ही सुविधा। जहां सभी जगहों पर काम करने वाले एक अकड़ का भाव रखते हैं वह एकदम सहज। सबने बताया यह सिरपुर के निवासियों की विशेषता हैं एक दम सीधे, सहज सरल। यहां संगोष्ठी में खाने की पूरी व्यवस्था महिलाओं द्वारा देखी गई।

खाने देने से लेकर उसके बाद की बर्तन धोने की सारी जिम्मेदारी। पानी देती महिलाएं कभी-कभी लोगों को जोर से बोल भी देती थीं। यहां किताबों के कई स्टॉल थे, बहुजन समाज और बौद्ध समाज की किताबें। जिनमें धर्म की एक नई व्याख्या मिली है।कई सुंदर पेंटिंग की प्रदर्शनी। संगोष्ठी में सभी के लिए रहने और खाने की व्यवस्था आयोजकों द्वारा की गई थी। सिरपुर के शांत वातावरण में महानदी के किनारे आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कई नई चीजें देखने को मिली। अक्सर यह देखा जाता है स्कूलों में ईश्वर की प्रार्थना की जाती है लेकिन यहां अंजू मैम जिन विद्यालयों को देखते हैं उनमें ऐसी कोई व्यवस्था नहीं, बल्कि संविधान से शुरुवात। मैम के विद्यार्थियों ने बहुत सुंदर क्रांतिकारी गीत गाए। नई पीढ़ी में अंबेडकर चेतना को मैम स्थापित कर रहे हैं।

अक्सर नृत्य करने वाले म्यूजिक चला कर प्रस्तुति देते हैं, यहां नृत्य देखा। जिसमें नृत्य

करने वाले गाते भी थे और प्रस्तुति भी देते थे। एक ऊर्जा जो इनमें थी किसी शहरी में शायद ही हो। एक दम सहज सरल लोग। संगोष्ठी की सबसे बड़ी खासियत थी उसका स्वरूप ऐसा था कि जन साधारण भी शामिल हुआ। जबकि अक्सर संगोष्ठी आदि ऐसी बनाई जाती हैं, कि उसमें एक वर्ग ही शामिल हो सकता है। पढ़ा लिखा वर्ग, जनसाधारण ऐसे आयोजन से दूर होते हैं। यहां संगोष्ठी में नाटक, गीत, नृत्य और प्रदेश के मुख्यमंत्री, व उनके पिता जी का शामिल होना स्थानीय लोगों को इस सम्मेलन से जोड़ पाया। लोग अपने बच्चों को लेकर आये थे। संगोष्ठी में देश के जाने-माने आलोचक, विमर्शकार, पत्रकार शामिल थे। जिनसे मिलने का आकर्षण लोगों में बहुत था। हम कितनी ही सुविधा कर लें लेकिन लोगों को हमसे शिकायत रहती ही है। यही इस सम्मेलन में हुआ। आयोजकों ने अपनी कोई कमी नहीं छोड़ी लेकिन लोग तो लोग हैं। कमी निकालने में माहिर। खैर, इस आयोजन ने देश विदेश में बौद्ध धर्म, अम्बेडकरवाद को नई ऊर्जा दी है। ऐसे आयोजन भले ही इतने बड़े स्तर पर न हो लेकिन छोटे छोटे होते रहने चाहिए। आयोजकों ने पूरी ऊर्जा के साथ लोगों का ध्यान रखा। इस आयोजन में मैंने पहली बार ज्योतीबा फुले और सावित्री बाई फुले पर कोई नाटक देखा। आदिवासी नृत्य, साथ ही अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति द्वारा किए गए प्रयास का पता लगा। यह सब चीजें नया अनुभव दे गईं। आयोजकों को बहुत बहुत बधाई इस कार्यक्रम के लिए। उम्मीद करते हैं आपकी यह विचार परंपरा चलती रहेगी।

रिपोर्टः आरती रानी प्रजापति

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here