काशी के दर्द को समेटे है ‘बनारस लाकडाउन’ : डॉ. उमेश

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चकिया : ललित निबंधकार डा. उमेश प्रसाद सिंह ने कहा कि साहित्य स्मृतियों को जीवित रखने की अद्भुत कला है। समय सारे घाव भर देती है‚ लेकिन मृग संजीवनी विधा साहित्य का एक ऐसा स्रोत है जिसमें मृतप्राय स्मृतियों को जिंदा करने की ताकत है। उक्त विधा का प्रभाव बनारस लाकडाउन पुस्तक में देखने को मिला। उक्त पुस्तक में पुरवा की मिठास व संजीदगी है। साथ ही लाकडाउन के वक्त मिले दर्द व पुराने घाव को किताब जगा जाती है। उक्त बातें श्री सिंह ने रविवार को नगर स्थित सामुदायिक भवन सभागार में बनारस लाकडाउन पुस्तक के दूसरे संस्करण के लोकार्पण अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही।

बनारस लाकडाउन का प्रभाव पुरवा हवा की तरह है जो पुराने दर्द को जगा जाती है। आधुनिक साहित्य चिंतन हमारे घर‚ परिवार‚ समाज व विचारधारा को बांटने का काम कर रही है। कहा कि आगे आने वाले समय में अखबार व पत्रिकाएं तो बहुत होंगी‚ लेकिन पत्रकार कम होंगे। डा. लेनिन रघुवंशी ने बनारस लाकडाउन को कोविड काल का प्रधान कृति बताया। कहा कि इस पुस्तक ने सभी समाज‚ सभी धर्म को जोड़ा। बनारस के घाट पर ब्राह्मण की आजीविका से लगायत मल्लाह की रोजी–रोटी पर आए संकट को शब्दों में सजोकर इस संकटकाल का सजीव लेखन किया गया है।

उन्होंने कहा कि एक शब्द में बनारस लाकडाउन का प्रभाव पुरवा हवा की तरह है जो पुराने दर्द को जगा जाती है। आधुनिक साहित्य चिंतन हमारे घर‚ परिवार‚ समाज व विचारधारा को बांटने का काम कर रही है। कहा कि आगे आने वाले समय में अखबार व पत्रिकाएं तो बहुत होंगी‚ लेकिन पत्रकार कम होंगे। डा. लेनिन रघुवंशी ने बनारस लाकडाउन को कोविड काल का प्रधान कृति बताया। कहा कि इस पुस्तक ने सभी समाज‚ सभी धर्म को जोड़ा। बनारस के घाट पर ब्राह्मण की आजीविका से लगायत मल्लाह की रोजी–रोटी पर आए संकट को शब्दों में सजोकर इस संकटकाल का सजीव लेखन किया गया है। कहा कि पुस्तक में लोगों के इतिहास को समेटने व सजोने की जरूरत को पूरा किया गया है। इस तरह के प्रयास समय–समय पर होने चाहिए। पुस्तक के अध्ययन से जाना जा सकता है कि किस तरह कोरोना ने कई आघात पहुंचाए‚ लेकिन इस दरम्यान लोगों ने अपने स्वाद को कढ़ाई में प्रयोग किया। नए स्वाट व नए टेस्ट को घर में आजमाया। अंत में उन्होंने कृषि को लाभ–हानि से इतर अपनी संस्कृति का हिस्सा बताया। इसके पूर्व राजकिशोर शर्मा बेहद‚ संपादक विजय विनीत‚ हृदय नारायण मिश्रा‚ शीतला प्रसाद‚ एम. अफसर खान को पत्रकारिता व साहित्य के क्षेत्र में उम्दा योगदान के लिए चंद्रप्रभा साहित्य सम्मान से नवाजा गया। अध्यक्षता चेयरमैन संतोष खरवार व संचालन विनय कुमार वर्मा ने किया।

याद किए गए दिवंगत चेयरमैन अशोक बागी

दिवंगत चेयरमैन अशोक बागी रविवार को चंद्रप्रभा साहित्य संस्था की ओर आयोजित समारोह में याद किए गए। इस दौरान संस्था ने उन्हें मरणोपरांत कोविडकाल में दिए गए योगदान के लिए कोरोना योद्धा सम्मान से सम्मानित किया। ऐसे में जब उनकी पत्नी मीरा जायसवाल सम्मान लेने मंच पर पहुंची तो अपनी पति की याद में उनकी आंखें छलक पड़ी और वे वहीं फफक–फफक कर रोने लगीं‚ जिन्हें डा. संगीता सिन्हा व उनके पुत्र से सहारा दिया। इसके अलावा संस्था ने खुशबू निशा‚ विभा मिश्रा को भी समाज को दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

लाकडाउन में लोगों ने खुबियों को खोजा व उसे निखाराः डा. संगीता

सामुदायिक भवन सभागार में चंद्रप्रभा साहित्य संस्था की ओर से वैश्विक संकट के दौर में कोविड की चुनौतियां विषय पर संवाद कार्यक्रम का आयोजन हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने कोविडकाल में सुरक्षित रहने के लिए बचाव व सतर्कता बरतने पर बल दिया।

इस दौरान सावित्री बाई फूले राजकीय डिग्री कालेज की प्राचार्य डा. संगीता सिन्हा ने कहा कि कोविडकाल में बहुत कुछ बदल गया है। वैश्विक दौर ने दूरी को समाप्त कर दिया था‚ लेकिन लोगों के बीच मानसिक व आत्मीय दूरी बढ़ गयी थी। लोग भौतिकवादी सुख के पीछे तेज से भाग रहे थे‚ जिस पर कोरोना ने पूर्ण विराम लगा दिया। ऐसे में लोग थम गए और लोगों ने अपनी खुबियों को खोजा और उसे निखारने का काम किया। उन चीजों को भी किया‚ जिसके लिए उनके पास वक्त नहीं था। उन्हें सोचने का समय मिला। कहा कि सीमित संसाधनों के साथ भी जीया जा सकता है। लोग मानसिक रूप से एक–दूसरे के करीब आए। लोगों के दर्द को बांटा। डा. वीपी सिंह ने कहा कि किसी भी वायरस पर तापमान का बहुत प्रभाव पड़ता है। कोरोना को लेकर लोगों की लापरवाही व बेफ्रिकी ठीक नहीं है। अनुशासित रहते हुए हर घर में कोरोना से बचाव के प्रयास होने चाहिए। कहा कि लोग भौतिकवादी चीजों के पीछे भागते–भागते प्रकृति से दूर हो गए हैं। अनुशासन व पर्यावरण को साफ रखने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना होगा। पुरातन पांच चीजों को अपनाकर कोरोना से बचा जा सकता है। इस अवसर पर किसान मंच के जैराम सिंह‚ डा. वीरेन्द्र बिंद‚ आशुतोष मिश्रा‚ वैभव मिश्रा‚ रतीश कुमार‚ विनोद‚ इबरार अली‚ सद्दाम खान‚ अजय जायसवाल‚ केशरीनंदन जायसवाल‚ मिथिलेश कुमार‚ डा.देवेन्द्र‚ गोविंद केशरी आदि उपस्थित रहे। संचालन विनय कुमार वर्मा व धन्यवाद ज्ञापन संस्था के सचिव हरविंश सिंह ने किया।

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