बाल साहित्‍यकार पर आलोचना की पहली किताब — द्वारिकाप्रसाद माहेश्‍वरी : सृजन और मूल्‍यांकन

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आलोचना की दिशा में एक और बड़ा कदम

बाल साहित्‍यकार पर आलोचना की पहली किताब

द्वारिकाप्रसाद माहेश्‍वरी : सृजन और मूल्‍यांकन

लेखक : डॉ ओम निश्‍चल
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सूरज निकला चिड़िया बोली, यदि होता किन्‍नर नरेश मैं –तकली रानी तकली रानी–वाले गीतों के रचयिता द्वारिकाप्रसाद माहेश्‍वरी को भला कौन नहीं जानता। वे हिंदी बाल साहित्‍य के अनूठे रचनाकार हैं तथा विशिष्‍ट काव्‍यकृतियों व साक्षरता उपयोगी प्रभूत साहित्‍य के साथ साथ पचास से ज्‍यादा बालगीत संग्रह हिंदी संसार को दिया तथा हजारों बालगीत लिखे हैं जो एनसीईआरटी के बाल पाठ्यक्रमों वे विभिन्‍न राज्‍यों की बाल पाठ्य पुस्‍तकों में पढ़ाए जाते हैं। उन पर हमारे समय के कवि आलोचक डॉ ओम निश्‍चल ने अपनी पहली आलोचना की पुस्‍तक 1985 में लिखी थी जो अब तक अप्राप्‍य थी। इसे पडित विद्यानिवास मिश्र ने उपपत्‍तिपूर्ण अनुशीलन कह कर अपनी भूमिका में सराहा है तो इसकी चर्चा “हिंदुस्‍तान” में करते हुए लमही के संपादक श्री विजय राय ने किसी भी बाल साहित्‍यकार पर लिखी पहली आलोचना की पुस्‍तक माना है। बाल साहित्‍य के मर्मज्ञ विद्वान डॉ प्रकाश मनु तथा अग्रणी बाल साहित्‍य समालोचक डॉ सुरेंद्र विक्रम ने बाल साहित्‍य के अध्‍ययन अनुशीलन में इस पुस्‍तक का महत्‍व स्‍वीकारा है।
माहेश्‍वरी जी आगरा के रोहता गांव में जन्‍मे, उत्‍तर प्रदेश के शिक्षा विभाग में पाठ्य पुस्‍तक अधिकारी से लेकर उपनिदेशक के पदों पर रहे वह साक्षरता निकेतन के निदेशक पद पर भी कार्य किया। हिंदी पढ़ने वाले बच्‍चे किसी न किसी कक्षा में उनका बाल गीत पढ़ चुके होते हैं। ऐसे वरेण्‍य रचनाकार माहेश्‍वरी जी पर लिखी पुस्‍तक का संवर्धित संस्‍करण अब रुद्रादित्‍य प्रकाशन से आ रहा है। समावेशी आलोचना की यह कृति 200 से ज्‍यादा पृष्‍ठों की है तथा हिंदी के जाने माने समालोचक डॉ ओम निश्‍चल, जो माहेश्‍वरी जी के निकट सान्‍निध्‍य में रहे हैं, ने इसे अब एक सर्वथा नव कथ्‍य – कलेवर प्रदान किया है। बाल साहित्‍य अब साहित्‍य महोत्‍सवों के चर्चा सत्रों का हिस्‍सा बन चुका है तथा साहित्‍य अकादेमी सहित राज्‍य स्‍तरीय हिंदी अकादमियों द्वारा बाल साहित्‍य को पुरस्‍कृत और प्रोत्‍साहित किया जाता है और अनेक विश्‍वविद्यालयों में इस पर शोध कार्य किए जा रहे हैं।

यह पुस्‍तक बाल साहित्‍य चिंतन और आलोचना को एक नई दिशा देगी इस आशा और विश्‍वास से रुद्रादित्‍य प्रकाशन समूह(Mail : rudraditya222@gmail.com, फोन 8175030339) को इसे लांच करते हएु प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है। पुस्‍तक शीघ्र ही रुद्रादित्‍य प्रकाशन समूह एवं आमेजन और अन्‍य प्‍लेटफार्म पर बिक्री के लिए उपलब्‍ध होगी। पेपर बैक संस्‍करण में इस कृति का रियायती मूल्‍य मात्र 275 रूपये रखा गया है।

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