रुद्रादित्य प्रकाशन करेगा डॉ.ओम निश्चल, रामस्वरूप चतुर्वेदी, राकेश कुमार सिंह, विनीता परमार और डॉ. अलका प्रकाश को सम्मानित

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रुद्रादित्य प्रकाशन समूह द्वारा लेखक सम्मानों की घोषणा

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चार लेखक विभिन्न नामित सम्मानों से होंगे सम्मानित।
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रूद्रादित्य प्रकाशन समूह के निदेशक अभिषेक ओझा ने बताया कि रुद्रादित्य प्रकाशन द्वारा 2022 के लिए डा.ओम निश्चल को आलोचना के लिए ‘रामस्वरूप चतुर्वेदी सम्मान’, राकेश कुमार सिंह को उपन्यास के लिए ‘फणीश्वरनाथ रेणु सम्मान’, कहानी के लिए विनीता परमार को ‘कमलेश्वर कथा सम्मान’ और कविता के लिए डा.अलका प्रकाश को ‘स्नेहमयी चौधरी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा.
प्रयागराजः हिंदी साहित्य के प्रमुख प्रकाशन समूह रूद्रादित्य प्रकाशन, इलाहाबाद ने साहित्य की विभिन्न विधाओं के लिए दिए जाने वाले पुरस्कारों की घोषणा की है. रूद्रादित्य प्रकाशन के निदेशक अभिषेक ओझा ने बताया कि समकालीन रचनाशीलता को रेखांकित करने के लिए इस वर्ष 2022 से साहित्य की विविध विधाओं जैसे- आलोचना, उपन्यास, कहानी और कविता में प्रकाशन से प्रकाशित सर्वोत्तम कृतियों के रचनाकारों को सम्मानित किया जाएगा.
सम्मान के लिए कृतियों का चयन करने के लिए एक निर्णायक मंडल बनाया गया. इस निर्णायक मंडल में प्रसिद्ध साहित्यकार विभूति नारायण राय, कुमार पंकज, अनिता गोपेश, प्रियदर्शन मालवीय, संजय श्रीवास्तव तथा संयोजक शशि कुमार सिंह शामिल थे. निर्णायक मंडल ने विभिन्न चरणों में अध्ययन के बाद सम्मान के लिए कुछ कृतियों का चयन किया है. इनमें ओम निश्चल की कृति ‘चर्चा की गोलमेज पर अरुण कमल’, उपन्यासकार राकेश कुमार सिंह की पुस्तक ‘महासमर की साँझ’, विनीता परमार की पुस्तक ‘तलछट की बेटियां’ और अलका प्रकाश का काव्य संग्रह ‘देह और प्रज्ञा के बीच’ शामिल हैं.

इन कृतियों के आधार पर डा.ओम निश्चल को आलोचना के लिए ‘रामस्वरूप चतुर्वेदी सम्मान’, राकेश कुमार सिंह को उपन्यास के लिए ‘फणीश्वरनाथ रेणु सम्मान’, कहानी के लिए विनीता परमार को ‘कमलेश्वर कथा सम्मान’ और कविता के लिए अलका प्रकाश को ‘स्नेहमयी चौधरी सम्मान’ से सम्मानित किया जाएगा. सम्मानित कृतियों के रचनाकारों को ये सम्मान 27 नवंबर को इलाहाबाद की हिंदुस्तानी एकेडमी में आयोजित समारोह में प्रदान किए जाएंगे.

चर्चा की गोलमेज पर अरुण कमल
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यह पुस्तक प्रसिद्ध कवि अरुण कमल के विभिन्न रूपों पर प्रकाश डालती है. आलोचक ओम निश्चल की यह पुस्तक अरुण कमल के व्यक्तित्व और कृतित्व, दोनों पर विभिन्न आयाम प्रस्तुत करती है. पुस्तक में उल्लेख किया गया है कि खुद ओम निश्चल, अरुण कमल और उनकी कविताओं को किस रूप और संदर्भ में देखते हैं. पुस्तक में अरुण कमल का साक्षात्कार है, उनकी कविताएं और कविताओं की समीक्षा है.
लेखक और संपादक प्रेमशंकर शुक्ल इस पुस्तक के बारे में लिखते हैं- अपनी ध्वन्यात्मकता से मोहाविष्ट करने वाले, समय की देह के साथ पीड़ित अंतरात्मा के अतल में उतरने वाले अरुण कमल को पढ़ना, उन्हें समझना कविता की कोख से उपजे जीवन–सारांश को समझना है. हिंदी के सुधी कवि, समीक्षक, भाषाविद् ओम निश्चल ने दशकों से कविता की काया और अंत:करण में रमते हुए अरुण कमल के कवि वैशिष्ट्य का जैसा सुपाठ यहां किया है, वह अन्यत्र दुर्लभ है. ‘चर्चा की गोलमेज़ पर अरुण कमल’ एक ऐसी कृति है जो एक साथ आलोचना और काव्यास्वाद दोनों रसों से परिपूर्ण है. जिस तरह कविता के नाप की भाषा अरुण कमल के पास है, वैसी सुपठनीय हलोरी पछोरी हुई भाषा में ओम जी ने अरुण कमल की कविता के विवेचन को एक उदात्त भाष्य में बदल दिया है.
राकेश कुमार सिंह का उपन्यास, विनीता परमार का कहानी संग्रह और अलका प्रकाश का कविता संग्रह भी आधुनिक हिंदी साहित्य संसार को इन कृती लेखकों की एक अनुपम देन है।

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