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प्रेम का संवेग न रोके रुकता है न जोड़े जुड़ता है

*यथार्थ और अभिनय* ******************* प्रेम के दो रूप है एक यथार्थ दूसरा अभिनय यथार्थ का कोई प्लाट नहीं अनुभूतियों का प्लाट होता है रोना भी यथार्थ है हँसना भी यथार्थ है जो होगा वह...

नक्सलवादी किसान विद्रोह के मूल्यांकन का प्रश्नः स्वदेश सिन्हा

एक चलते हुए आंदोलन के बारे में लिखना बहुत कठिन होता है, विशेष रूप से 'नक्सलवादी किसान विद्रोह के बारे में इसके सटीक मूल्यांकन...

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‘मज़दूरों के पास संघर्ष के सिवाय बचा नहीं है कोई रास्ता’

साझी विरासत बचाना वक़्त की जरूरत:शमा परवीन हमें वंचितों की...

निर्माण मज़दूरों को ठेके पर नहीं करना चाहिए जोड़इया-पोतइया का काम

हमारा मोर्चा के कार्यकारी संपादक कामता प्रसाद की ओर...