दुबई में रहने वाले खान बंधु का जरूरतमंद लोगों की मदद के सराहनीय कदम

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  • विशद कुमार

जब पूरा विश्व कोरोना का प्रकोप झेल रहा है, तो खाड़ी देश और भारत कैसे अछूता रह सकता है। इस संक्रमण में सबसे अधिक परेशानी अप्रवासी एवं प्रवासी भारतीयों, खासकर बिहार झारखण्ड के मजदूरों को हुई है। कई लोगों की खाड़ी देशों में नौकरी चली गई, तो कई बीमार पड़ गए। बेरोज़गार होकर भी स्वदेश लौटने का कोई प्रबंध नहीं था और न ही पैसा था। वहीं स्वदेश में कई लोग हज़ारों मील पैदल चलकर अपने घर वापस लौटे हैं।

 

   “लेट्स वॉक अगेन” नाम से संस्था चलाते हैं खान ब्रदर जरूरतमंद भारतीयों की मदद के लिए

ऐसी कठिन परिस्थियों में कई लोग और कई संगठन जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए आगे आये हैं। ऐसे ही लोगों में शामिल हैं दुबई में रहने वाले खान बंधु (असलम बदर खान और डॉ. आज़म बदर खान)। असलम बदर खान पेशे से आई टी इंजीनियर हैं और अपनी कंपनी जज़ा ट्रेडिंग के नाम से चलाते हैं। उनके भाई डॉ. आज़म बदर खान दुबई के एक निजी अस्पताल में ऑर्थोपेडिक सर्जन हैं।

दोनो भाइयों अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर “लेट्स वॉक अगेन” नाम से संस्था चलाते हैं और संयुक्त अरब अमीरात में ज़रूरतमंद भारतीयों की हर तरह की मदद करते हैं। किसी की नौकरी चली जाए तो दूसरा रोजगार ढूंढ़ने में मदद करता है और जबतक नौकरी नहीं मिलती है तबतक वे उनकी आर्थिक सहायता करते हैं। कोई मजदूर का कंपनी द्वारा उनका बकाया वेतन नहीं दिया जाता है तो उनको हक़ दिलाने का काम भी करते थे। डॉ. आज़म बदर खान दुबई में गरीब मजदूरों का मुफ़्त में ईलाज भी करते हैं। ये लोग बिहार में गरीब लोगों का स्वास्थ्य एवं शिक्षा के क्षेत्र में करीब पाँच वर्षों से काम कर रहे है.

कोरोना संक्रमण में खान बंधुओं ने सहराणीय काम किया है जिसकी जितनी प्रशंसा की जाए कम है। इन लोगों ने संयुक्त अरब अमीरात में फंसे हुए करीब एक हज़ार अप्रवासी भारतीयों जिनकी नौकरी चली गई और पैसा नहीं ऐसे जरूरतमंद लोगों को रखा, उनके खाने पीने एवं अन्य जरूरतों को पूरा किया और अपने पैसा से उन्हें स्वदेश लौटने में मदद की। इसके अलावा वे लोग उत्तर प्रदेश, बिहार और झारखंड के विभिन्न संगठनों और संपर्क के लोगों के द्वारा दस हज़ार से अधिक लोगों को दो महीने तक खाने का प्रबंध किया और करीब पच्चास हजार से अधिक भोजन किट बटवाएं। उन्हें 23 नवंबर 2019 को संयुक्त अरब अमीरात के संस्कृति, युवा एवं सामाजिक विकास मंत्री शेख़ नहयान अल मुबारक अल नहयान द्वारा “प्रथम ह्यूमानिटेरियन टॉलरेन्स” अवार्ड सम्मानित किया गया था।
उनके पिता डॉ. बदर खान गया में प्रसिद्ध चिकित्सक और समाजसेवी हैं।

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