बिल्किस बानो के बलात्कारियों, हत्यारों को फिर से जेल भिजवाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाते हुए जन संघर्ष खड़ा करो

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इप्टा की राष्ट्रीय समिति ने गुजरात सरकार द्वारा गुजरात मे 2002 में बिलकीस बानो सामूहिक बलात्कार एवं 3 साल के बच्चे समेत 13 लोगों की जघन्य हत्या में आजीवन कारावास की सजा काट रहे अपराधियों को कथित अच्छे आचरण के आधार पर रिहा किये जाने के फैसले पर आश्चर्य व्यक्त करते हुए फैसले की कड़ी निंदा की है। इप्टा के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह एवं महासचिव राकेश ने एक वक्तव्य में कहा है कि यह विडंबना ही है कि एक ओर आज़ादी के 75वें वर्ष में जब देश को अपने संबोधन में प्रधानमंत्री “नारी सम्मान” का आह्वान करते हैं वहीं दूसरी ओर गुजरात सरकार सामूहिक बलात्कार और जघन्य हत्याओं के अपराधियों को कथित अच्छे आचरण के लिए जेल से रिहा करने का निर्णय लेती है जो नितांत दुर्भाग्यपूर्ण, अनैतिक और गैर कानूनी है। उन्होंने देश की सर्वोच्च अदालत से एक बार फिर मामले का स्वतः संज्ञान लेने की अपील की है क्योंकि पहले भी उसी के हस्तक्षेप से इस मामले के आरोपियों को सजा मिल सकी थी।
15 अगस्त को लाल किले से नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमें महिलाओं का सम्मान करना चाहिए । उसी दिन उन्हीं की बीजेपी सरकार ने उन 11 लोगों को रिहा कर दिया जो गुजरात दंगों के दौरान बिलकिस बानो के सामूहिक बलात्कार के लिए ज़िम्मेदार थे और उनकी 3 साल की बेटी और उनके रिशेदारों के भी हत्यारे थे ! ये है आपका अमृत काल ? बिलकिस की कहानी सुनेंगे तो आपको सुनकर इंसानियत पर से विश्वास उठ जाएगा । 2002 में जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री थे तब गुजरात में नरसंघार हुआ जिसमें मरने वाले ज़्यादातर मुसलमान थे और इन दंगों को सरकारी संगरक्षण प्राप्त था। दंगाइयों को हत्या और बलात्कार करने की खुली छूट मिली हुई थी । उस दौरान बिलकिस जो कि 21 साल की थीं और 5 महीने की गर्भवती थीं, के साथ एक एक कर कई लोगों ने बलात्कार किया । उनकी 3 साल की बच्ची को इतना ज़ोर से फेंका गया कि उसकी मौत हो गई ! उनके साथ जो रिश्तेदार थे उनकी हत्या कर दी गई और कुछ और महिलाओं का भी रेप किया गया, जिसमें उनकी माँ भी शामिल थीं ! बिलकिस बेहोश हो गई थीं , जब वह उठीं तो बदन पर कपड़े नहीं थे , बहुत दूर भटकने के बाद उन्हें एक आदिवासी महिला ने कुछ कपड़े दिए । बिलकिस सालों तक इस नाइंसाफी के खिलाफ कोर्ट में लड़ती रहीं। तब जाकर इन लोगों को मुंबई के कोर्ट से उम्र कैद की सज़ा मिली । 15 अगस्त को अमृत महाउत्सव मनाते हुए बीजेपी की गुजरात सरकार ने इनकी बाकी की सज़ा माफ कर दी ! इन बलात्कारियों और हत्यारों के बाहर आने के बाद पैर छूए गए, इन्हें लड्डू खिलाए गए और विश्व हिन्दू परिषद ने इनका सम्मान किया ! महिला सशक्तिकरण के लिए ये निर्णय मील का पत्थर साबित होगा है न ? धर्म के रक्षकों से पूछना चाहूँगा उनकी भावनाएं अब आहात क्यूँ नहीं हो रही हैं ? बिलकिस की वकील का कहना है कि उन्हें डर है कि ये लोग अब बाहर आकार क्या करेंगे । ये है फासीवाद में एक और दिन ! ये यहाँ का इंसाफ है ! ऐसा अमृत काल आप ही को मुबारक हो !

बिल्किस बानो के बलात्कारियों, हत्यारों को फिर से जेल भिजवाने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर संयुक्त मोर्चा बनाते हुए जन संघर्ष खड़ा करो।
निंदा प्रस्ताव पारित कराना, मैं बहुत आहत हूं, दुखी हूं, वाले छाती कूट विलाप का, वरना, कोई अर्थ नहीं। ये भी एक किस्म की आत्म मुग्धता है, बुजदिली है, अपनी जिम्मेदारी से मुंह छुपाने की कवायद है। पीड़िता के साथ मजाक है। फासीवाद का मुकाबला निंदा प्रस्तावों से नहीं, सड़कों पर उतरने से होता है।

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