कृषि कानूनों के विरोध में अधिवक्ताओं की सभा : किसान आंदोलन के साथ कदम से कदम मिलाकर चलने का किया आह्वान 

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 विशद कुमार
     अधिवक्ता जन वाराणसी द्वारा आज 30 जनवरी को 3:30 बजे से तहसील सदर के सभागार में किसान विरोधी कृषि कानूनों के खिलाफ एक सभा का आयोजन किया गया।
सभा का संचालन करते हुए अधिवक्ता प्रेम प्रकाश सिंह यादव ने तीनों कृषि कानूनों के बारे में बताते हुए कहा कि
 1- कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य संवर्धन व सरलीकरण अधिनियम 2020  कृषि मंडियों की प्रासंगिकता को सुन्न करने व निजी मंडियों को बिना किसी पंजीकरण व जवाबदेही की पूजीपतियों के हवाले करने का कानून है ।
2 – कृषि सशक्तिकरण व संरक्षण कीमत आश्वासन और कृषि सेवा करार अधिनियम 2020 यह खेती को कांट्रैक्ट पर देकर पूंजीपतियों के हवाले करने की योजना है।
3 –  आवश्यक वस्तु संशोधन अधिनियम 2020 आवश्यक वस्तुओं के कालाबाजारी को कानूनी जामा पहनाने व कालाबाजारी को मान्यता देने का कानून है।
 सभा को संबोधित करते हुए एडवोकेट  कृष्ण चंद्र यादव किशन ने कहा की हमें किसानों के आंदोलन को समर्थन देने के साथ-साथ व्यवस्था परिवर्तन की लड़ाई लड़नी होगी। जबतक हमारे समाज को मानसिक गुलामी का एहसास नहीं होगा तब तक मनुवादी लोग एक-एक करके कानून बनाते रहेंगे और ईवीएम से सरकार चलाते रहेंगे।
 एडवोकेट मनमोहन गुप्ता कहा कि किसान आंदोलन रोटी का आंदोलन है, अगर किसान विरोधी कानून वापस नहीं हुए तो देश की आम जन की स्थिति गुलामी से भी बदतर होगी। उन्होंने कहा कि कृषि कानून को लागू करने में जितना सरकार जिम्मेदार है उतना ही विपक्ष भी जिम्मेदार है ।
सभा में अपना विचार व्यक्त करते हुए एडवोकेट राम रेणु चंदन ने कहा कि यदि सरकार कृषि कानूनों को वापस नहीं लेती है तो हम लोग अधिवक्ताओं को लामबंद कर पीएमओ कार्यालय का घेराव करके सरकार को कानून वापस लेने हेतु बातें करेंगे।
 एडवोकेट सुरेंद्र चरण ने कहा कोरोना काल में सारे धंधे बंद हो गए थे तब खेती किसानी ने ही हमें बचाया, ऐसे में अगर उक्त किसान विरोधी कानून वापस नहीं लिए गए तो फिर देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाएगी। अधिवक्ता अनिल कुमार चंदन कहा कि हम लोग अधिवक्ता के साथ-साथ किसान भी हैं, इसीलिए हम लोग किसानों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर आंदोलन चलाएंगे और कानून वापस होने तक लड़ाई को आगे बढ़ाएंगे।
सभा को एडवोकेट अरविंद कुमार यादव, एडवोकेट वीर बहादुर राजभर, एडवोकेट विवेक शर्मा, एडवोकेट राजनाथ, एडवोकेट जान, एडवोकेट जितेंद्र, एडवोकेट सुरेश पाल आदि अधिवक्ताओं ने मुख्य रूप से संबोधित किया।
सभा में अधिवक्ताओं ने एक स्वर से और  सर्वसम्मति से तीनों किसान विरोधी कृषि कानूनों को वापस लेने, न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारंटी सुनिश्चित करने हेतु कानून बनाने, ईवीएम की जगह से बैलेट पेपर से चुनाव कराने व जातिगत जनगणना की मांग की।
सभा की अध्यक्षता वरिष्ठ अधिवक्ता एडवोकेट विश्राम यादव ने की तथा धन्यवाद ज्ञापन एडवोकेट नागेंद्र ने किया।

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