कृषि कानूनों के खिलाफ वामपंथी पार्टियों ने किया प्रदर्शन

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*जगह -जगह कार्यकर्ताओं ने दी गिरफ्तारी*
प्रयागराज, 8 दिसंबर 2020
भारत सरकार के तीन कृषि कानूनों के विरोध में 14 दिनों से पंजाब हरियाणा दिल्ली बॉर्डर सहित पूरे देश भर में चल रहें भारी विरोध के आज फिर भारत बंद का आह्वान किया गया। सुबह से ही जगह जगह भारी विरोध प्रदर्शन हुआ। प्रयागराज में भी भारत बंद समर्थन में भाकपा-माले व अन्य दलों ने हिस्सा लिया व उप मंडी स्थल फूलपुर को बंद करवाया। भाकपा-माले पोलित ब्यूरो सदस्य कॉमरेड राम जी रॉय, ऐक्टू राष्ट्रीय सचिव व भाकपा-माले जिला प्रभारी कॉमरेड डॉ. कमल उसरी, R.Y.A. से प्रदिप ओबामा सहित अन्य लोगों को प्रयागराज पुलिस ने प्रदर्शन स्थल से गिरफ्तार कर लिया।
वहीं इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र संघ भवन पर छात्र-युवाओं ने प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान ही पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार कर लिया गया था। गिरफ्तार होने वालों में युवा संगठन RYA के राज्य सचिव सुनील मौर्य, सुमित गौतम और छात्र संगठन AISA के राज्य उपाध्यक्ष शक्ति रजवार,विवेक कुमार, धनेश कुमार  सम्मिलित रहे।
नवाब युसूफ रोड पर विभिन्न वामपंथी पार्टियों एवं जन संगठनों के कार्यकर्ताओं एकत्रित होकर कृषि कानूनों के खिलाफ प्रदर्शन किया प्रदर्शन के दौरान जनसभा को संबोधित करते हुए भाकपा माले के पोलित ब्यूरो सदस्य कामरेड रामजी राय ने कहा कि “आप सब जानते होंगे कि गाँव में खेती लाभदायक रोज़गार नहीं रह गया। फसल के अलाभकारी दाम, क्रय केन्द्रों की मनमानी, बिजली की दर में बढ़ोत्तरी, आवारा पशुओं का आतंक आदि के चलते गाँव के तमाम नौजवान पहले से ही खेती छोड़ने को मजबूर होते जा रहे थे। सरकार के तमाम दावों के बावजूद मनरेगा की दशा खराब ही है। उस पर सरकार तीन किसान विरोधी कानून भी ले आई है। जो किसान तमाम बेतुकी शर्तों और क्रय केन्द्रों पर अनावश्यक समय लगाने और उनके अनियमित होने के चलते, क्रय केन्द्रों पर जाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम0एस0पी0) पर अपना अनाज बेचने की बजाय  आढ़तियों के पास औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर हैं, उनसे किसी दूसरे जिले या राज्य में जाकर अपना अनाज बेचने के लिए ’आज़ाद’ होने की बात करना, उनका मज़ाक उड़ाने जैसा है। सरकार ने मण्डियां खत्म कर दी हैं और कानूनों में कहीं भी एम0एस0पी0 पर सरकारी खरीद को बाध्यकारी नहीं बनाया है। असल में, यह छूट केवल बड़े-बड़े व्यापारियों के लिए है। इससे किसान की फसल के दाम और गिरेंगे। ऐसा मौजूद समय में धान की खरीद में साफ दिखाई दे रहा है। किसान आढ़तियों के पास अपना अपना धन पिछले साल से भी कम मूल्य में बेचने को मजबूर है। साथ ही, सरकार ने तिलहन, दलहन, अनाज और आलू आदि के भण्डारण की सीमा समाप्त कर, जमाखोरी को ही बढ़ावा दिया है। नतीजा आलू, प्याज, दाल आदि के दामों में बेतहाशा वृद्धि के रूप में साफ दिखाई दे रही है। इसी के साथ सरकार ठेका खेती भी शुरू करने जा रही है। जहां या तो एक किसान खुद ही अपने खेत में मजदूर बनने के लिए मजबूर हो जायेगा या अपनी ज़मीन पट्टे पर बड़ी-बड़ी कम्पनियों को दे देगा। पट्टे पर ज़मीन के मालिकाना हक पर विवाद होने पर एक किसान अदालत भी नहीं जा पायेगा। इससे गांवों में बेरोज़गारी और बढ़ेगी।”
सभा को संबोधित करते हुए डॉक्टर कमल उसरी ने कहा कि “आप सब जानते होंगे कि गाँव में खेती लाभदायक रोज़गार नहीं रह गया। फसल के अलाभकारी दाम, क्रय केन्द्रों की मनमानी, बिजली की दर में बढ़ोत्तरी, आवारा पशुओं का आतंक आदि के चलते गाँव के तमाम नौजवान पहले से ही खेती छोड़ने को मजबूर होते जा रहे थे। सरकार के तमाम दावों के बावजूद मनरेगा की दशा खराब ही है। उस पर सरकार तीन किसान विरोधी कानून भी ले आई है। जो किसान तमाम बेतुकी शर्तों और क्रय केन्द्रों पर अनावश्यक समय लगाने और उनके अनियमित होने के चलते, क्रय केन्द्रों पर जाकर न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम0एस0पी0) पर अपना अनाज बेचने की बजाय  आढ़तियों के पास औने-पौने दामों पर फसल बेचने के लिए मजबूर हैं, उनसे किसी दूसरे जिले या राज्य में जाकर अपना अनाज बेचने के लिए ’आज़ाद’ होने की बात करना, उनका मज़ाक उड़ाने जैसा है। सरकार ने मण्डियां खत्म कर दी हैं और कानूनों में कहीं भी एम0एस0पी0 पर सरकारी खरीद को बाध्यकारी नहीं बनाया है। असल में, यह छूट केवल बड़े-बड़े व्यापारियों के लिए है। इससे किसान की फसल के दाम और गिरेंगे। ऐसा मौजूद समय में धान की खरीद में साफ दिखाई दे रहा है। किसान आढ़तियों के पास अपना अपना धन पिछले साल से भी कम मूल्य में बेचने को मजबूर है। साथ ही, सरकार ने तिलहन, दलहन, अनाज और आलू आदि के भण्डारण की सीमा समाप्त कर, जमाखोरी को ही बढ़ावा दिया है। नतीजा आलू, प्याज, दाल आदि के दामों में बेतहाशा वृद्धि के रूप में साफ दिखाई दे रही है। इसी के साथ सरकार ठेका खेती भी शुरू करने जा रही है। जहां या तो एक किसान खुद ही अपने खेत में मजदूर बनने के लिए मजबूर हो जायेगा या अपनी ज़मीन पट्टे पर बड़ी-बड़ी कम्पनियों को दे देगा। पट्टे पर ज़मीन के मालिकाना हक पर विवाद होने पर एक किसान अदालत भी नहीं जा पायेगा। इससे गांवों में बेरोज़गारी और बढ़ेगी।
किसानों के समर्थन में भारत बंद के दौरान इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ भवन से  गिरफ्तार हुए इंकलाबी नौजवान सभा (इनौस ) के प्रदेश सचिव सुनील मौर्य  ने कहा कि सरकार दमन के बल पर किसानों के आंदोलन को कुचल नहीं सकती है. किसान के बेटे हम छात्र- नौजवान किसानों के आंदोलन के साथ मजबूती से खड़े हैं. सरकार पूरे देश में निजी करण लागू करके रेल, बीमा, बिजली समेत सभी संस्थानों को कारपोरेट के हवाले कर रही है. जिससे नौजवानों – छात्रों को मिलने वाला रोज़गार छीन लिया गया है. अगर जमीन भी कारपोरेट के हवाले हो जाएगी तो छात्रों -नौजवानों के सपनों को पूरा नहीं किया जा सकता. लिहाजा हम लोग तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ मजबूती से किसानों के आंदोलन का समर्थन कर लड़ रहे हैं.
 उन्होंने कहा कि हम गिरफ्तारी से डरने वाले नहीं हैं. जरूरत पड़ेगी तो इलाहाबाद का छात्र नौजवान दिल्ली में किसानों के साथ प्रदर्शन में शामिल होगा.
किसान संगठन AIKM के जिलाध्यक्ष सुभाष कुशवाहा, खेत एवं मनरेगा मजदूर संगठन AIRALA के जिलाध्यक्ष पंचम लाल, मजदूर संगठन AICCTU के जिलाध्यक्ष एस.सी. बहादुर, सफाई मजदूर एकता मंच के सचिव संतोष कुमार, महिला संगठन AIPWA की जिला संयोजक रूपा देवी, नौजवान संगठन इनौस के नेता अलिक मौर्य, छात्र संगठन AISA के जिला सचिव सोनू यादव ने पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारी की कड़ी निंदा करते हुए सभी साथियों को तत्काल रिहा करने की मांग की।

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