मेरिट के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया का किया विरोध

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29 जून 2020 को “आइसा” ने आज कुलपति राकेश भटनागर से मुलाक़ात की और आने वाले सत्र 2020-21 में दाख़िले को मेरिट आधार पर करने की प्रक्रिया को तुरंत वापस लेने को लेकर बात की व छात्रों के साथ किया मीटिंग । *

छात्र संगठन आइसा (BHU) के संज्ञान में प्रिंट मीडिया एवं अन्य संचार माध्यमों से यह सूचना आया था कि विश्वविधालय प्रशासन, कोरोना महामारी का हवाला देकर पूर्व विदित प्रवेश परीक्षा की जगह विभिन बोर्ड के १२ वीं कक्षा में छात्रों द्वारा प्राप्त किये गए अंको के आधार पर चयन हेतु, अलग -अलग संकायों से प्रस्ताव पारित करवा रही है। इस सम्बन्ध में बतौर एक छात्र संगठन होने के नाते हमारा कर्तव्य बनता है कि हम छात्र हितों के मुद्दों और उनके चिंताओं से विश्वविधालय प्रशासन को अवगत कराएं।

संगठन के द्वारा आज कुलपति को ज्ञापन दिया गया जिसमें नई प्रवेश प्रणाली को ले कर सवाल किए गए । ज्ञापन में कहा गया कि काशी हिन्दू विश्वविधालय में बहुत पहले से ही प्रवेश परीक्षा के आधार पर नामांकन प्रक्रिया रही है, जो कि विश्वविधालय में प्रवेश के इच्छुक प्रत्येक छात्र को लोकतान्त्रिक तरीके से परीक्षा में भाग लेने का समान मौका देती है। परन्तु वर्तमान समय में विश्वविधालय प्रशासन जिस कथित अंक आधारित मेधा की बात कर रहा है, उसमे सारे छात्रों को प्रवेश परीक्षा में शामिल होने का कोई मौका ही नहीं दिया जा रहा है जो कि सरासर अन्यायपूर्ण और अलोकतांत्रिक है।

संगठन ने इस प्रणाली को भेदभापूर्ण बताया और कहा कि काशी हिन्दू विश्वविधालय में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल, बिहार, झारखण्ड, छत्तीसगढ़, राजस्थान, उत्तराखंड और उत्तर-पूर्व भारत जैसे पिछड़े राज्यों और आर्थिक रूप से कमजोर तबके से आते है। सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े होने के वजह से इन छात्रों को वो सारी सुविधाएं नहीं मिल पाती है जो बड़े शहरों में पढ़ने वाले अमीर लोगों के बच्चों को प्राप्त होता है। वो सुविधाएं एक ग्रामीण इलाके के छात्र के लिए बहुत ही दुष्कर है, इन दो परिस्थितों की तुलना करने पर कथित अंक आधारित मेधा की बात ही गरीब छात्रों के साथ बेईमानी और धोखाधड़ी प्रतीत होती है। अतः प्रथम दृष्टा ही विश्वविधालय प्रशासन का यह विचार संविधान द्वारा प्रदत सामाजिक न्याय के अधिकार की हकमारी है।

अतः छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए छात्र संगठन आइसा ने विश्वविद्यालय प्रशासन से मांग किया की किसी भी हालत में १२ वीं के अंको के आधार नामांकन न किया जाए और प्रवेश परीक्षा के अलावा अन्य किसी विकल्प को न आजमाया जाए व विश्वविधालय प्रशासन किसी भी प्रकार का एक तरफा निर्णय लेने से बचे क्यूंकि बिना छात्रों की राय जाने कोई भी निर्णय छात्रों पर थोपना, कोरोना महामारी के इस चुनौतीपूर्ण समय में विश्वविधालय प्रशासन के गैर-जिम्मेदाराना और मनमाने रवैये को दर्शाता है। विश्वविद्यालय प्रशासन तत्काल प्रभाव से हमारी मांगों व सुझावों पर विचार करे और छात्र हितों को ध्यान में रखते हुए निर्णय करे।

इसी मुद्दे पर आज विश्ववद्यालय परिसर में आइसा ने छात्रों के साथ मीटिंग की व प्रशासन के इस रवैया पर सवाल खड़ा किया है और इसके विरोध में छात्रों को एकजुट करने का बात किया ।

कुलपति को ज्ञापन देने आइसा के राज्य सह – सचिव विवेक कुमार , राजेश , आनंद , विक्रम , अंकित , उज्ज्वल , नरेश इत्यादि मौजूद थे ।

प्रेषक
प्रियंक मणि
आइसा – बीएचयू यूनिट

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