अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय समुह द्वारा कबीर सप्ताह का किया गया भव्य समापन समारोह

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विशद कुमार

11 जुलाई शाम 6.30 से अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय समूह द्वारा पिछले कई दिनों से चल रहे कबीर सप्ताह का आभासी पटल पर ही भव्य समापन समारोह आयोजित किया गया, जिसमें अध्यक्ष की भूमिका पद्मश्री डॉ भारती बंधु, सह-अध्यक्ष की भूमिका पद्मश्री प्रह्लाद टिपानिया और विशिष्ट  अतिथि की भूमिका डॉ. मृदुल कीर्ति (आस्ट्रेलिया) एवम् डॉ. शैल अग्रवाल (यू के) ने निभाई। जिसमें विश्व के जाने माने साहित्यकारों व कलाकारों ने कार्यक्रम को भव्यता प्रदान की।

उललेखनीय है कि पिछले कई दिनों से अभ्युदय अंतर्राष्ट्रीय समुह द्वारा सात दिन, सात संचालको द्वारा संचालित नित्य नये—नये साहित्यिकारों व कलाकारों द्वारा 20 मिनट तथा 5 मिनट का दो चरणों में लाइव प्रसारण किया जाता रहा। जिसमें विश्व भर से लगभग सैकड़ों प्रतिभावान प्रतिभागियों ने भाग लेकर कार्यक्रम को वैश्विक स्तर पर अनूठा बना दिया।
सात संचालकों में ज्योति तिवारी, पल्लवी शर्मा, अजय यादव, सविता भुवानिया, दर्शना शर्मा, मंजरी पाण्डेय, मंजु तंवर आदि रहीं।
आज कार्यक्रम का समापन समारोह अद्भुत रहा जिसमें पद्मश्री भारती बंधु तथा पद्मश्री प्रह्लाद सिंह टिपानिया, मृदुल, डॉ. अमरनाथ अमर, डॉ. शैल अग्रवाल, डॉ. सुचित्रा काॅल मिश्रा, लक्ष्मीशंकर बाजपेयी, ममता किरण, डॉ. श्रीनारायण समीर आदि गणमान्य का आगमन एवम् उद्बोधन कार्यक्रम की सफलता का कारण था। साथ ही आकाशवाणी के अवकाश प्राप्त प्रख्यात साहित्यकार व उद्घोषक भीम की मधुर आवाज में मंच का संचालन उनके द्वारा पिछले वर्षों में किए रेडियो प्रसारण में उद्घोषक की भूमिका की याद दिलाता रहा, मंच संचालक की भूमिका में संस्था अध्यक्ष डॉ. इन्दु झुनझुनवाला रही ।
सच में कार्यक्रम अति सुंदर तथा सार्थक था। कबीरवाणी या उनकी कविता का अति मधुर स्वरूप तभी प्रकट होता है जब उसे स्वरबद्ध कर गाया जाए। संत कबीरदास और भी अधिक हृदय में पैठ जाते हैं जब उनके शब्द स्वरबद्ध हो कर कानों में पड़ते हैं, इन सारी बातों का सभी संचालक मंडल के सदस्यों व साहित्यकारों ने कार्यक्रम को सफल बनाने में योगदान दिया। बताते चलें कि कार्यक्रम में झारखंड साहिबगंज से प्रो सुबोध कुमार झा ने अपने व्याख्यान द्वारा समस्त श्रोतागणों को मंत्रमुग्ध कर दिया। दोनों सांझा संकलनों के लिए, सभी को सम्मानपत्र देने के लिए आदरणीय इंदुजी व उनकी मंडली को सभी साहित्यिकारों ने धन्यवाद दिया।


आज का समापन समारोह इतना भव्य रहा कि शब्दों में उसकी अभिव्यक्ति कर पाना असम्भव है। सच ही यह अमृत महोत्सव सिद्ध हुआ और कबीर कलश की अमृत बूँदों में भींज सभी कृतार्थ हुए। जहाँ एक ओर ज्ञान वर्षा हुई, वहीं दूसरी ओर भारती बंधु और प्रह्लाद टिपनिया  के कबीर भजनों के मधुर गायन ने हम सबको भक्ति रस में सराबोर कर दिया। सम्मान समारोह, पुस्तक लोकार्पण सब सुव्यवस्थित रहा। इस समारोह की सफलता का पूर्ण श्रेय इन्दु को जाता है, जिसकी सोच रूपी बीज आज पुष्पित पल्लवित हुआ, सभी गणमान्य महानुभावों को आभार एवं सभी अभ्युदय परिवार के साथियों ने भारतीय संगीत, संस्कार, संस्कृति व परम्परागत साहित्य को पुनरूत्थान का जो प्रयास किया है, उसके संस्था प्रशंसा के योग्य हैं। समारोह का समापन संस्था  के उपाअध्यक्ष भीमप्रकाश शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन किया और अन्त में चन्दा प्रह्लादका ने वंदे मातरम् गाकर समापन किया।

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