हिन्दुवादी संगठनों के खिलाफ आदिवासियों में पनपता आक्रोश

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विशद कुमार

बिरसा सेना, जमशेदपुर के संरक्षक मंडल के सुनिल सोरेन, दिनकर कच्छप और बलराम कर्मकार द्वारा वरीय पुलिस अधीक्षक पूर्वी सिंहभूम, झारखण्ड को एक संयुक्त—पत्र भेज कर कहा है कि क्षेत्र के कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा शहर में गौ मांस के नाम पर दंगा भड़काने एवं हेमंत सरकार को बदनाम करने की नापाक कोशिश की जारी रही है, जिसे जिला प्रशासन द्वारा नहीं रोका गया और उनपर जल्द से जल्द ठोस कारवाई नहीं की गई तो शहर को किसी बड़ी घटना होने से नहीं बचाया जा सकता।


पत्र में साफ साफ लिखा गया है कि उपरोक्त विषय पर सूचित करना है कि विगत 31 जुलाई को कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा गौ रक्षक के नाम पर बारीनगर, टेल्को में दंगा भड़काने की कोशिश की गई। गौ रक्षा के नाम पर न केवल बक़रीद के मौके पर टेल्को क्षेत्र में दंगा भड़काने की कोशिश की गई बल्कि इस वर्ष जून में भी ख़ासमहल क्षेत्र में गौ मांस के नाम पर तीन आदिवासियों के साथ मारपीट एवं जाति सूचक शब्दों के साथ गाली दी गई एवं अपमानित किया गया था। इसकी स्थानीय पुलिस को शिकायत के बाद भी पुलिस के संरक्षण में ही वे खुले में घूम रहे थे और पीड़ित आदिवासियों को जेल जाना पड़ा था।
पत्र में आगे कहा गया है कि देश के विभिन्न हिस्सों के अलावा झारखण्ड में भी मॉब लिंचिंग की अनेक घटनाएं प्रशासन की उदासीनता के कारण हुई हैं, जिसमें मुसलमानों के अलावा आदिवासियों, पिछड़े एवं दलितों को भी मारा गया है। जल, जंगल और जमीन हम आदिवासियों की है और हमारे ही जमीन पर हमारे भाईयों की पिटाई हो और हत्याएं हों, अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पत्र में यह भी कहा गया है कि सत्ता गवाने के बाद मौजूदा राज्य की हेमंत सरकार की लोकप्रियता से विरोधियों की बेचैनी बढ़ गई है। लॉकडाउन में भी कदमा में फल विक्रेता की आड़ में भी धर्म के नाम ओछी राजनीतिक की गई थी। ये लोग लगातार किसी न किसी बहाने दंगा भड़काने के प्रयास में लगे हुए हैं पर जिला प्रशासन की मुस्तैदी और राज्य सरकार राज्य के जनता के प्रति अपनी वचनबद्धता के कारण इनकी घिनौनी हरकत को विफल किया जाता रहा है, जिसके लिए हमारा संगठन उनका आभार प्रकट करती है।
पत्र के अंत में अनुरोध किया गया है कि शहर में घटित घटनाओं को गंभीरता पूर्वक लेते हुए असामाजिक एवं धर्म के नाम पर राजनीति करने वाले लोगों पर जल्द से जल्द ठोस कारवाई की जाए ताकि कोई बड़ी घटना होने से शहर को बचाया जा सके।


बताते चलें कि पिछले 05 जुलाई 2020 को जुगसलाई तोरोफ़ पारगाना के दासमत हांसदा ने एक प्रेस बयान जारी कर बताया था कि जुगसलाई तोरोफ़ पारगाना आखाड़ा पोंड़ेहासा सुंदरनगर में माझी परगना महाल आदिवासी सामाजिक स्वाशासन व्यवस्था का कोल्हान स्तरीय बैठक संपन्न हुई। बैठक में आदिवासियों के ऊपर गोमांस का आरोप लगाकर उनपर हिन्दू संगठनों द्वारा की जा रही गुंडागर्दी के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया गया और कहा गया कि हम आदिवासी आदिकाल से सभी तरह के मांस का सेवन करते रहे हैं, कभी हमारे साथ इसे लेकर किसी ने किसी तरह के प्रतिबंध की बात नहीं की, लेकिन हाल के दिनों में हिन्दूत्वादी संगठन के लोग हमारा विरोध ही नहीं कर रहे हैं बल्कि कानून को अपने हाथ में लेकर आदिवासियों के साथ गुंडागर्दी करते हैं और विधि व्यवस्था के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं, जिसका हम विरोध करते हैं।

उक्त अवसर पर सर्वसम्मति से 6 सूत्रीय निर्णय लिया गया।
जिसमें
1 — झारखंड प्रांत के पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में राज्य सरकार द्वारा बनाई गई झारखंड गोवंश पशु हत्या प्रतिषेध अधिनियम 2005 से आदिवासी समुदाय (अनुसूचित जनजातियों) को केंद्रीत कर उनके ऊपर जो बारंबार हमला हो रहा है वह पूर्णरूपेण अवैध और गैरकानूनी है।
2 — आदिवासियों के ऊपर जो हमला विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ताओं द्वारा किया जा रहा है उसके लिए पूरे संथाल समाज उनके विरुद्ध सभी तरह की कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। चाहे कानूनी हो या सीधे कार्रवाई के तहत उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
3 — धाड़ दिशोम परगना के नेतृत्व में या भी निर्णय लिया गया कि जब तक बाहरी गैर आदिवासी विश्व हिंदू परिषद संस्था के लोक प्रतिबंधित मांस के नाम पर मारपीट करना बंद नहीं करेगा। तब तक पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों में हिंदुओं की धार्मिक संस्कृति कार्यक्रम में आदिवासी जैसे सरस्वती पूजा, गणेश पूजा, दुर्गा पूजा में शामिल नहीं होंगे ।
4 — पांचवी अनुसूचित क्षेत्रों के भीतर किसी भी बाहरी गैर आदिवासी को गांव में किसी तरह का व्यापार या कारोबार भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 (5)(6) के तहत गांव में नहीं करने दिया जाएगा कोई भी आदिवासी किसी गैर आदिवासी के दुकान से भी दैनिक जरूरत के वस्तु खरीद बिक्री नहीं करेंगे।
5 — इसके लिए धाड़ दिशोम, सिंग दिशोम, पारगाना के साथ जुगसलाई तोरोफ़, हल्दीपोखर तोरोफ़, दामपड़ा तोरोफ़, असनबनी तोरोफ़ के पारगाना के साथ-साथ दुमका जिला और गिरिडीह जिला से सामाजिक प्रतिनिधि उपस्थित हुए थे इसके साथ जुगसलाई तोरोफ़ क्षेत्र के कई माझी बाबा भी उपस्थित हुए।
6 — इस बैठक में भारत में चल रहे लोग डाउन का सोशल डिस्टेंस का पूरा ख्याल रखते हुए केवल समाज के प्रमुख लोगों को ही बुलाया गया था। इस बैठक में जुगसलाई तोरोप  परगना ने अध्यक्षता करते हुए कहा कि पांचवी अनुसूचित क्षेत्र में अवैध रूप से जो विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल आदिवासियों के साथ गुंडागर्दी करते हुए कानून को हाथ में ले रहे हैं ऐसे आसामाजिक तत्व या संगठन के लोगों के विरुद्ध प्रशासन या सरकार अभिलंब कार्रवाई करें। अन्यथा आदिवासी समाज उनके विरुद्ध सीधी कार्रवाई के लिए बाध्य होंगा, जिसकी सारी जिम्मेवारी प्रशासन पर होगी।

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