चंद्रशेखर आज़ाद के 90वें शहादत दिवस पर अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच ने दी श्रद्धांजलि

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अखिल भारतीय प्रगतिशील छात्र मंच (A.I.P.S.F.)इकाई आज़मगढ़ के तत्वाधान में आज चंद्रशेखर आज़ाद के 90वें शहादत दिवस पर पालीटेक्निक तिराहा, हर्रा की चुंगी पर स्थित उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कार्यक्रम व किसान संगठनों के आह्वान पर “मजदूर-किसान एकता दिवस” का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम में- चंद्रशेखर आजाद अमर रहे, इंकलाब जिंदाबाद, पूंजीवाद साम्राज्यवाद मुर्दाबाद, तीनों कृषि कानूनों को रद्द करो, नई शिक्षा नीति वापस लो, निजीकरण मुर्दाबाद, श्रम कानूनों में संशोधन वापस लो, किसानों-मजदूरों-छात्रो की एकता जिंदाबाद के नारें गर्मजोशी के साथ लगाए गए।

संदीप ने कहा कि हिंदुस्तान समाजवादी प्रजातान्त्रिक सेना (H.S.R.A.)के कमांडर इन चीफ आज़ाद का जीवन बड़े संघर्षों से भरा हुआ था।उन्होंने कहा था कि हम दुश्मनों की गोलियों का सामना करेंगे,आज़ाद थे- आज़ाद हैं- आज़ाद ही रहेंगे। आज़ाद जी का सपना था कि हम एक शोषणविहीन समाज का निर्माण करेंगे।

आज जब पूरे देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और किसानों के संदर्भ में तीनों काले कृषि कानूनों, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संसाधनों,शिक्षा के निजीकरण आदि से पूरा समाज परेशान हैं। ऐसे में आज शहीद आज़ाद के विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है।

राहुल ने कहा कि हम सब एक छात्र हैं और हमारा कर्तव्य है कि आज आज़ाद जी कि शहादत दिवस पर उनको याद करें और आज़ाद ने जिस तरह हर प्रकार के जुल्म और अन्याय के खिलाफ मरते दम तक लड़ा ठीक उसी तरह युवाओं को संघर्ष करना चाहिए तभी समस्याओं का समाधान हो सकेगा।हमें अपने अभिभावकों यानी कि किसानों मजदूरों के सच्चे आंदोलन में तन मन धन से भागीदारी करके आंदोलन को मजबूत बनाना चाहिए।

दानबहादुर ने सरकार के जनविरोधी नीतियों की आलोचना किया और कहा कि हमें तीनो कृषि क़ानून के दोनों पक्षों को पढ़कर व उसका वास्तविक मूल्यांकन कर सभी को समझना चाहिए और देशव्यापी मजदूरों- किसानों-छात्रो की एकता कायम करते हुए आंदोलन आगे बढ़ाना चाहिए।

आज़ाद ने महान क्रांतिकारी के व्यक्तित्व के बारे में बताते हुए कहा कि एक क्रांतिकारी अपने आदर्शों की प्राप्ति के लिए कुछ भी कर सकता है और यही आज़ाद जी ने शहीद होकर कर दिखाया था। ब्रिटीश साम्राज्यवादियों ने जिस तरह क्रांतिकारियों को आतंकवादी कहा था ठीक उसी तरह आज भी किसानों के आंदोलन के बारे में कई सारे नाम जैसे- आतंकवादी, देशद्रोही, खालीस्तानी आदि नाम दिया जा रहा है। अंत मे प्रशांत ने कहा कि आज जब पूरे देश में गरीबी, भुखमरी, बेरोजगारी और किसानों के संदर्भ में तीनों काले कृषि कानूनों, श्रम कानूनों में मजदूर विरोधी संसाधनों,शिक्षा के निजीकरण आदि से पूरा समाज परेशान हैं। ऐसे में आज शहीद आज़ाद के विचारों की प्रासंगिकता और भी बढ़ जाती है। इस कार्यक्रम में हरिकेश, अनिरुद्ध, संदीप, श्रेय, अमन, सचिन, विश्वजीत, आजाद , दानबहादुर, आकाश,राहुल,अवधेश, आकाश आदि लोग उपस्थित रहे।

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