7 दिवसीय यात्रा का समापन 6 अगस्त को सारनाथ में होगा

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  • लमही से कैथी पहुँची ‘जन अधिकार चेतना यात्रा’

  • शिक्षा स्वास्थ्य रोजगार और खेत के मुद्दों पर हो रहा है संवाद

 वाराणसी : जिले से 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर उनके पैतृक गांव लमही से सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट एवं एक देश समान शिक्षा अभियान के संयुक्त तत्वावधान में सात दिवसीय ‘जन अधिकार चेतना यात्रा’ का शुभारम्भ हुआ था यात्रा कैथी पहुँची,

आशा ट्रस्ट के समन्वयक बल्लभाचार्य पाण्डेय ने इस यात्रा का स्वागत एवं सभी का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि जन अधिकार चेतना यात्रा के माध्यम से हम सभी के लिए बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार के अधिकार और खेती किसानी से जुड़े मुद्दे को आमजन की आवाज बनाना चाहते हैं जिससे ये सवाल तमाम राजनैतिक पार्टियों और चुनाव में आने वाले प्रत्याशियों तक पहुंचे और वे इसके प्रति संवेदनशील बन सकें सदन में जाने पर उनकी कोई जवाबदेही सुनिश्चित हो। वक्ताओं ने इस यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यात्रा आम जन को जागरूक करने की एक बेहतरीन पहल है इससे निश्चित रूप में लोगों में जागरूकता आएगा।
यात्रा का समापन हिरोशिमा दिवस पर छह अगस्त को सारनाथ वाराणसी पहुँचकर होगा।
इससे पहले मुंशी प्रेमचंद की जयंती पर उनके पैतृक गांव लमही से चली ‘जन अधिकार चेतना यात्रा’ विभिन्न कस्बों, बाजारों से होते हुए रविवार की सुबह वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता वल्लभाचार्य पांडे के गाँव पहुँची है। यात्रा में शामिल दल का हर कोई समर्थन और उत्साहवर्धक कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसदीय क्षेत्र वाराणसी के बुद्धिजीवी वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने 31 जुलाई को मुंशी प्रेमचंद जी की जयंती पर उनके पैतृक निवास लमही से हरी झंडी दिखाकर ‘जन अधिकार चेतना यात्रा’ को रवाना किया था। यात्रा के संयोजक दीन दयाल सिंह ने बताया कि लमही वाराणसी से प्रारंभ होकर यात्रा गाजीपुर, मऊ, बलिया, देवरिया, गोरखपुर, कुशीनगर, महराजगंज, आजमगढ़, जौनपुर होते हुए हिरोशिमा दिवस पर छह अगस्त को सारनाथ वाराणसी पहुंचेगी। इस बीच यात्रा दल के साथी रास्ते में पड़ने वाले गांवों, बस्तियों, कस्बों और शहरों में पर्चे, पोस्टर, स्टीकर, जन गीत, जन संवाद आदि के माध्यम से अपनी चार सूत्रीय मांगों के पक्ष में समर्थन जुटा रहे है। यात्रा में 12 सदस्य शामिल हैं।
यात्रा हिरोशिमा दिवस पर छह अगस्त को सारनाथ वाराणसी पहुंचेगी, वही इस यात्रा का समापन होगा।

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