सामूहिक रोग प्रतिरोधकता को लेकर एक नजरिया यह भी!!!

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सामूहिक रोग प्रतिरोधकता के लिए शायद 20-25% आबादी को ही संक्रमण काफ़ी हो>
कोरोना मामले में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता के बारे में शुरू से ही यह अनुमान लगाया गया कि जब तक लगभग 60-70% आबादी को यह संक्रमण नहीं हो जाता, तब तक यह रोग प्रतिरोधकता समाज में आम नहीं होगी। इसी तर्क के आधार पर सामूहिक रोग प्रतिरोधकता का समर्थन करने वालों का विरोध करने के लिए ऐसे तर्क दिए गए कि अगर किसी देश की 60-70% आबादी को यह संक्रमण होगा और उसका 1% भी अगर इसकी मृत्यु दर हुई (जो कि इससे कहीं कम है) तो भी करोड़ों लोग मारे जाएँगे! इसी तर्क के आधार पर लंदन के इम्पीरियल कॉलेज ने अपनी मशहूर (और धीरे-धीरे बदनाम हो रही!) रिपोर्ट में यह दावा किया था कि इंग्लैंड में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता की नीति अपनाने से कोरोना “कहर” 2.5 लाख लोगों की जान ले लेगा। निश्चित रूप से, यह रिपोर्ट अब कई सवालों में घिर चुकी है, परंतु अब इसके सामने एक और चुनौती नई खोजों की ओर से आ रही है।

लिवरपूल स्कूल ऑफ ट्रोपिकल मेडिसिन ने एक नई रिपोर्ट पेश की है, जिसके मुताबिक, किसी समाज में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता की सीमा 10-20% है यानी कि इतने प्रतिशत आबादी को संक्रमण होने से समाज में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता विकसित हो जाती है। ऐसा ही एक और दावा स्टॉकहोम तथा नौटिंघम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है, जिन्होंने तजवीज़ की कि शुरुआती मॉडलों के 60-70% के मुकाबले में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता की सीमा पार करने के लिए 43% का आँकड़ा ही काफ़ी है। ऐसे ही अध्ययनों के आधार पर इंग्लैंड के स्वतंत्र शोधकर्ता निक लुईस के अनुसार यह सीमा 7-24% तक है। इस आधार पर इन्होंने दावा किया है कि कुछ शहरों में यह सीमा पार भी की जा चुकी है यानी वहाँ आम आबादी में सामूहिक रोग प्रतिरोधकता पैदा हो चुकी है।

लुईस के मुताबिक क्लासिक मॉडल समाज को एक बंद बक्से के रूप में देखता है, जिसमें लोगों के बीच कोई विभिन्नता नहीं है। जबकि यदि हम इसके पहलुओं जैसे कि अलग-अलग लोगों का वायरस के प्रति प्रतिक्रिया, उनकी अन्य को संक्रमित करने की क्षमता, भौगोलिक तथा घरेलू भिन्नताएँ आदि पर विचार करेंगे तो हम सामूहिक रोग प्रतिरोधकता के सही आँकड़ों तक पहुँच पाएँगे। लुईस ने स्वीडन के स्टॉकहोम शहर की मिसाल देते हुए समझाया कि स्वीडन सरकार का दावा था कि 11 अप्रैल तक शहर की आबादी के 17% को तथा 1 मई तक 25% को यह संक्रमण हो जाएगा। परंतु दिलचस्प बात यह है कि 11 अप्रैल के बाद इस शहर के अस्पतालों में नए मामलों की रफ़्तार धीमी पड़ गई। इससे लुईस ने निष्कर्ष निकाला है कि सामूहिक रोग प्रतिरोधकता की सीमा 11 अप्रैल तक ही पूरी हो चुकी थी, यानी कि 17%। इस मॉडल के सबसे नज़दीकी अनुभव के रूप में हमारे पास ‘डायमंड प्रिंसस’ नामक समुद्री जहाज़ का मामला है, जहाँ जनवरी में पूरे जहाज़ में यह संक्रमण फैला, परंतु कुल 3711 यात्रियों में से 712 यानी कि 19% को ही यह संक्रमण हुआ था।

बेशक ये सभी शोध-कार्य नए हैं और आने वाले समय में ही अन्य डॉक्टरों, वैज्ञानिकों द्वारा इनकी समीक्षा होगी, पर इतनी बात तय है कि जिन शुरुआती मॉडलों ने इंग्लैंड, अमरीका जैसे देशों की नीतियों को प्रभावित किया, वे मॉडल अब बेतुके साबित होते जा रहे हैं।

– मुक्ति_मार्ग

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