विश्व स्वास्थ्य संगठन को दिए जाने वाले अमेरिकी अनुदान पर लगाई गई रोक की निंदा

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भोपाल। राष्ट्रीय सेक्युलर मंच के संयोजक एल. एस. हरदेनिया एवं धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के प्रति समर्पित लेखक एवं सामाजिक कार्यकर्ता डा राम पुनियानी ने कहा है कि इस समय सारे विश्व को अमेरिका की निंदा करनी चाहिए। यहां जारी एक संयुक्त वक्तव्य में दोनों ने कहा है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन को अमेरिका द्वारा दिए जाने वाले अनुदान पर रोक लगाकर वहां के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक गंभीर अपराध किया है।
इस संकटकाल में आवश्यकता तो इस बात की थी कि अमेरिका अपने अंशदान को दोगुना करता। यह निर्णय इतना निंदनीय है कि अमेरिका में भी उसकी बड़े पैमाने पर भत्सर्ना की जा रही है।
यह दुःख की बात है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अभी तक अमेरिका के इस निर्णय की आलोचना में एक शब्द तक नहीं कहा है।
अमेरिका ने पूर्व में भी संयुक्त राष्ट्रसंघ और उससे संबद्ध संस्थाओं को दी जाने वाली सहायता बंद की है। जब भी संघ या उससे संबद्ध कोई संस्था ऐसा निर्णय लेती थी जो अमेरिका को पसंद नहीं आता था तो अमेरिका उसके द्वारा दी जाने वाली वित्तीय सहायता में कमी कर देता था या उसे बंद कर देता था।
वक्तव्य में याद दिलाया गया है कि जब यूनेस्को ने न्यू इन्फारमेशन आर्डर का प्रारूप तैयार किया और उसे यूनेस्को ने लगभग मंजूर कर लिया तब अमेरिका ने धमकी दी थी कि यदि यह लागू होता है तो वह यूनेस्को को दिया जाने वाला अंशदान बंद कर देगा और यूनेस्को की सदस्यता त्याग देगा। अमेरिका को लगा था कि न्यू इन्फारमेशन आर्डर लागू होने से सूचना के आदान-प्रदान पर उसका एकाधिकार समाप्त हो जाएगा।

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