नागेपुर और कैथी स्थित आशा ट्रस्ट के केन्द्रों को कोरोना राहत कार्य हेतु उपयोग में लाए जाने की पेशकश

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ट्रस्ट की तरफ से गृहमंत्रालय और मुख्य मंत्री को भेजा गया प्रस्ताव

वाराणसी: सामाजिक संस्था आशा ट्रस्ट द्वारा केन्द्रीय गृह मन्त्रालय एवं उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिख कर प्रस्ताव भेजा गया है कि कोरोना के संकट के दौर में यदि सरकार को शेल्टर होम, आपदा राहत केंद्र, खाद्यान्न गोदाम, अस्थायी स्वास्थ्य केंद्र , कोरेंटाइन सेंटर जैसी आवश्यकताओं के लिए जरूरत हो तो आशा ट्रस्ट के उत्तर प्रदेश स्थित 3 केन्द्रों के परिसर एवं भवन का प्रयोग किया जा सकता है . इन केन्द्रों में दो वाराणसी में और एक बलिया में स्थित है, जहाँ सामान्य दिनों में वंचित वर्ग के बच्चों के लिए शिक्षण प्रशिक्षण जैसे कार्यक्रमों का संचालन किया जाता है.

आशा ट्रस्ट की तरफ से ट्रस्टी एवं समन्वयक वल्लभाचार्य पाण्डेय द्वारा मुख्यमंत्री एवं बलिया तथा वाराणसी के जिलाधिकारियों को मेल भेज कर कहा गया है कि सरकार यदि चाहे तो इन केन्द्रों का उपयोग कोरोना आपदा अवधि के समय कर सकती है. श्री पाण्डेय के अनुसार वर्तमान में आशा ट्रस्ट द्वारा देश के विभिन्न स्थानों पर कोरोना सम्बन्धित जन जागरूकता, जरूरत मंद लोगों को खाद्यान्न और आवश्यक सामग्री का वितरण, मास्क निर्माण जैसे कार्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं,लॉक डाउन अवधि में परिसर का प्रयोग कोरोना राहत शिविर के रूप में किया जा सकता है. उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में आशा ट्रस्ट से जुड़े कार्यकर्ता भी राहत कार्य में जुटने के लिए तत्पर हैं.

वाराणसी जिले में आशा ट्रस्ट के दो केंद्र हैं जिसमे एक प्रधानमंत्री के आदर्श गाँव नागेपुर में स्थित है और दूसरा गंगा के तट पर कैथी के निकट भंदहा कला गाँव में स्थित है, इस दोनों केन्द्रों से जरूरतमंद लोगों की सहायता का कार्य विगत दो सप्ताह से जारी है. ज्ञातव्य है कि आशा ट्रस्ट की स्थापना 1992 में वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता एवं मैग्सेसे प्ररस्कार सम्मानित डा संदीप पाण्डेय ने की थी, वर्तमान में इस संस्था का कार्य देश कई राज्यों में हो रहा है.

प्रेषक
वल्लभाचार्य पाण्डेय
9415256848

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