पुलिस दमन के खिलाफ आवाज उठाने पर अभिलाख सिंह पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने का विरोध करो!!!

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पंतनगरः लॉक डाउन के चलते दर दर भटक रहे मज़दूरों पर पुलिस उत्पीड़न का विरोध करने पर इंकलाबी मज़दूर केंद्र के कार्यकर्ता व ठेका मज़दूर कल्याण समिति ,पंतनगर के साथी अभिलाख पर पंतनगर (उत्तराखंड)थाने की पुलिस ने राजद्रोह(sedition) का मुकदमा दर्ज किया है।
गौर तलब है कि साथी अभिलाख सिंह पंतनगर विश्वविद्यालय में नियुक्त कर्मचारी हैं जो लंबे समय से ठेका मज़दूर कल्याण समिति, पंतनगर के माध्यम से ठेका मज़दूरों के शोषण के खिलाफ उनके हक अधिकारों की आवाज उठाते रहे हैं।स्थायी कर्मचारी होने के बावजूद अपनी खुद की नौकरी जाने के खतरे को अनदेखा करते हुए वे लगातार ठेका मज़दूरों के हितों के लिए पंतनगर विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ लगातार संघर्षरत रहे हैं।

पन्तनगर विश्विद्यालय फार्म के ठेके मज़दूरों के विगत समय में स्वतः स्फूर्त आंदोलन हुए हैं। ठेका मज़दूरों के इन संघर्षों के चलते प्रशासन को पिछले समयों में ठेका मज़दूरों की बहुत सी मांगों को मानने को मजबूर होना पड़ा।ठेका मजदूरों के इन शानदार संघर्षों में ठेका मजदूर कल्याण समिति व अभिलाख की प्रभावी भूमिका रही है।
ठेका मजदूरों की ई.एस.आई.सी. व ई.पी.एफ.,स्थायीकरण की मांग पर हाईकोर्ट में याचिका लगाने,हाईकोर्ट से ई.एस.आई.सी लागू कराने के संबंध में विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आदेश प्राप्त करने एवं लागू कराने को तलब कराने हेतु कानूनी संघर्ष में साथी अभिलाख की निर्णायक व मुख्य भूमिका रही थी ।

इन संघर्षों के चलते ठेका मज़दूर कल्याण समिति के खिलाफ पन्तनगर विश्वविद्यालय
प्रशासन,पन्तनगर थाना पुलिस एक गठजोड़ कायम हो चुका था। विगत समयों में यह गठजोड़ ठेका मज़दूर कल्याण समिति के अग्रणी कार्यकर्ताओं के खिलाफ साज़िशें रचता रहा है लेकिन ठेका मज़दूरों के एकजुट संघर्ष से उनको हर बार पीछे हटने को मजबूर होना पड़ा है।कुछ समय पहले ठेका मज़दूर कल्याण समिति पन्तनगर के सक्रिय कार्यकर्ता व इंक़लाबी मज़दूर केंद्र के सदस्य ठेका मज़दूर मनोज कुमार को ठेका मज़दूरों के आंदोलन में नेतृत्वकारी भूमिका निभाने के कारण सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था ।न्यूनतम वेतन दिलाने व वेतन भुगतान को यह संघर्ष था जो सफल रहा था।ठेका मजदूरों ने साहस का परिचय देकर साथी मनोज की कार्यबहाली कराई थी ।साथी मनोज की कार्यबहाली हेतु ठेका मज़दूरों के संघर्ष में साथी अभिलाख की अग्रणी भूमिका रही थी।
साथी अभिलाख की ठेका मज़दूरों के आंदोलन में सक्रियता व अग्रणी भूमिका से विश्वविद्यालय प्रशासन व पुलिस प्रशासन साथी अभिलाख के प्रति रंजिश रखने लगा था और उन्हें फंसाने के मौके की तलाश में जुट गया था।

24 मार्च को मोदी सरकार द्वारा कोरोना महामारी के चलते किये गए लॉक डाउन ने पूरे देश के स्तर पर मज़दूर मेहनतकशों खासकर असंगठित मज़दूरों को बुरी तरह प्रभावित किया है ।यह लॉक डाउन मज़दूरों मेहनतकशों पर कहर बनके टूटा है ।रोज खाने कमाने वाले गरीब असंगठित मज़दूर भूख और बेकारी के चलते तमाम बड़े औद्योगिक केंद्रों और दिल्ली ,मुम्बई जैसे महानगरों से पैदल सैंकड़ों किलोमीटर दूर अपने गाँवों को मजबूर हो गए हैं।इन त्रस्त मज़दूरों की सुध लेने,उन्हें राहत पहुंचाने के बजाय पुलिस प्रशासन का व्यवहार इनके प्रति बेहद असंवेदनशील और क्रूरतापूर्ण रहा है। पुलिस द्वारा भूख ,प्यास और थकान से त्रस्त इन मज़दूरों,यहां तक कि महिलाओं को क्रूरतापूर्वक पीटने की कई हृदयविदारक वीडियो सोशल मीडिया में वायरल भी हुए हैं।सरकार का दलाल तथाकथित मुखयधारा के मीडिया द्वारा लॉक डाउन के इस क्रूर तथ्य को कभी जनता के सामने नही लाया गया।
लॉक डाउन के इस संकटपूर्ण समय में,जो मज़दूरों के लिए सबसे संकट पूर्ण है,साथी अभिलाख हमेशा की तरह भुखमरी की स्थिति में पहुँच चुके मज़दूरों को अपनी टीम के साथ राहत पहुंचाने में तत्पर थे। वे
पुलिस प्रशासन द्वारा भूख व अभाव से त्रस्त के मजदूरों की सहायता करने के बजाय उनके प्रति घोर उपेक्षा दिखाने और असंवेदनशीलता की हद तक कुछ स्थानों पर पुलिस द्वारा इन त्रस्त मज़दूरों मेहनतकशों की क्रूर पिटाई से बहुत क्षुब्ध थे।पुलिस के इसी असंवेदनशील व्यवहार व क्रूर पिटाई का विरोध करते हुए साथी अभिलाख ने एक पोस्ट पन्तनगर के सिडकुल औद्योगिक क्षेत्र की यूनियनों के ग्रुप में डाली थी। एक मुखबिर की सूचना पर इस सम्बंध में पन्तनगर थाने की पुलिस ने साथी अभिलाख को दिनांक 31 मार्च को थाने बुलाया।3 घंटे पूछताछ के नाम से उन्हें तरह तरह से प्रताड़ित किया गया।उनका मोबाइल जब्त कर लिया। फिर अगले दिन एस.टी. एफ.(उत्तराखंड) में नक्सल गतिविधियों की रोकथाम के नाम पर गठित विशेष सुरक्षा बल) द्वारा पूछ ताछ के नाम पर उन्हें पुनः थाने बुलाया गया।पूछताछ के बाद उनपर धारा 124(A)के तहत मुकदमा दर्ज कर दिया।
पन्तनगर थाने की पुलिस द्वारा की गई उपरोक्त कार्रवाई पूरी तरह बदले की भावना से की गई है एवम शासन सत्ता के खिलाफ असंतोष को कुचलने की एक साजिश है।अभिव्यक्त के अधिकार का यह खुला उल्लंघन है।
इंक़लाबी मज़दूर केंद्र सभी मज़दूर संगठनों व ट्रेड यूनियनों, जनवादी प्रगतिशील संगठनों जनपक्षधर बुद्धिजीवियों व न्यायप्रिय जनता से अपील करता है कि वे पन्तनगर पुलिस द्वारा साथी अभिलाख सिंह के खिलाफ की गई इस दमनात्मक कार्यवाही का पुरजोर विरोध करें तथा पुलिस प्रशासन के इस मज़दूर विरोधी-जन विरोधी कार्यवाही के खिलाफ मज़दूर वर्ग व व्यापक मेहनतकश जनता की संग्रामी एकजुटता प्रदर्शित करें।
प्रति
मुख्यमंत्री महोदय/पुलिस महानिदेशक महोदय
उत्तराखंड सरकार देहरादून
विषय – सामाजिक कार्यकर्ता एवं मजदूर साथी अभिलाख सिंह का पुलिस द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न पर रोक लगाने के बाबत।

महोदय,
उपरोक्त संदर्भ में निम्नलिखित बिंदुओं पर आपको अवगत कराते हुए न्याय हित में तत्काल आपके हस्तक्षेप को आमंत्रित कर रहे हैं।
1. यह कि अभिलाख सिंह पंडित गोविंद बल्लभ पंत कृषि विश्वविद्यालय पंतनगर, जिला उधम सिंह नगर (उत्तराखंड ) में विगत लगभग 2 दशकों से एक कर्मठ मजदूर के रूप में कार्यरत हैं।
2. यह कि अभिलाख सिंह पंतनगर कृषि विश्वविद्यालय के ठेका मजदूरों एवं आसपास के क्षेत्रों में एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में स्थापित हैं। प्रत्येक अन्याय-अत्याचार एवं शोषण का मुखर विरोध करने वाले व्यक्ति के रूप में स्थापित हैं।
3. यह कि अभिलाख सिंह पंतनगर विश्वविद्यालय के ठेका मजदूरों की पंजीकृत समिति-ठेका मजदूर कल्याण समिति में सचिव के पद पर हैं और इंकलाबी मजदूर केंद्र के सक्रिय कार्यकर्ता हैं। श्री अभिलाख सिंह लंबे समय से पंतनगर के ठेका मजदूरों के विभिन्न अधिकारों खासकर ई.एस.आई., पी.एफ की सुविधा व स्थाई नियुक्ति के लिए संघर्षरत रहे हैं। इस वक्त माननीय उच्च न्यायालय उत्तराखंड, नैनीताल में पंतनगर विश्वविद्यालय के ठेका कर्मियों को ईएसआई सुविधा दिये जाने के संबंध में आदेश दिया हुआ है। यह आदेश अभी तक लागू नहीं हुआ है। क्योंकि श्री अभिलाख सिंह उच्च न्यायालय में इस मामले को लेकर पैरवी कर रहे हैं इसलिए वह विश्वविद्यालय से लेकर प्रशासन की निगाहों में चढ़े हुए थे। इसलिए एक अस्पष्ट पोस्ट को निशाना बनाकर उनको उत्पीड़ित किया जा रहा है। देशद्रोह जैसा गंभीर मुकदमा दर्ज किया जा रहा है।
4. यह कि अभिलाख सिंह पंतनगर विश्वविद्यालय एवं आसपास के क्षेत्रों में जनता के न्यायपूर्ण संघर्षों में तत्परता के साथ शामिल होते हैं। इसलिए पुलिस-प्रशासन उनके प्रति द्वेष भावना रखने लगा है।
5. यह कि पंतनगर थाना पुलिस द्वारा उपरोक्त द्वेष भावना के तहत ही अभिलाख सिंह का उत्पीड़न कर परेशान किया जा रहा है।
6. यह कि दिनांक 31-3-2020 को पंतनगर थानाध्यक्ष(एस.ओ) द्वारा अभिलाख सिंह को उनके मोबाइल फोन पर संपर्क कर पंतनगर थाने में आने को कहा। अभिलाख सिंह तत्काल ही सायं 6ः30 बजे (लगभग) पंतनगर थाने पहुंचे। वहां उन्हें लगभग 3 घंटे तक अकारण ही बैठाकर रखा गया और उत्पीड़न किया गया।
7. यह कि पंतनगर थानाध्यक्ष द्वारा उन्हें बताया गया कि उनके द्वारा सोशल मीडिया पर पुलिस प्रशासन एवं पुलिस एक्ट को अंग्रेजों के जमाने का बताकर पोस्ट की गई है। यह आईपीसी की धारा 124 (ए) के तहत राजद्रोह का मामला बनता है। इस पर आजीवन कारावास होगी। इसके पश्चात थानाध्यक्ष द्वारा अभिलाख सिंह का उपरोक्त मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया और कहा कि अब इस मामले की जांच एस.टी.एफ. द्वारा की जाएगी।
8. यह कि अगले दिन 1 अप्रैल 2020 को पंतनगर थानाध्यक्ष द्वारा अभिलाख सिंह को प्रातः 10ः00 बजे पुनः थाने बुलाया गया । अभिलाख सिंह के नाम से प्रार्थना पत्र पुलिस ने स्वयं लिखा। इसमें लिखा था कि आईपीसी की धारा 124 (A) के तहत राजद्रोह का अभियुक्त। आगे लिख गया कि मैं अभिलाख सिंह जांच में सहयोग करने को अपना मोबाइल फोन जमा कर रहा हूं। मुझे पूछताछ के लिए जब भी बुलाया जाएगा, मैं हाजिर हो जाऊंगा। इसके पश्चात उपरोक्त प्रार्थना पत्र में पांच छह लाइनों के बराबर नीचे को खाली स्थान छोड़कर उसके नीचे हस्ताक्षर करने को कहा। अभिलाख सिंह द्वारा इसका विरोध करने पर चार-पांच पुलिस वालों ने उन्हें डराया-धमकाया और जबरिया हस्ताक्षर करवाए गए।
9. यह कि जब अभिलाख सिंह द्वारा पंतनगर थानाध्यक्ष से पूछा कि आप तो कल रात कह रहे थे कि सुबह को तुम्हें मोबाइल दे दूंगा और खाली पूछताछ की बात कर रहे थे। परंतु आज इस कागज पर मुझे देशद्रोह के मामले का अभियुक्त क्यों लिख रहे हैं, मेरा मोबाइल क्यों नहीं दे रहे हैं। तो पंतनगर थानाध्यक्ष द्वारा अभिलाख सिंह को कहा कि तुमने मोबाइल से मैसेज डिलीट कर दिए हैं। इसलिए जांच के लिए रख लिया है। इस पर अभिलाख सिंह ने उनसे कहा कि कल रात से मेरा मोबाइल फोन तो आपके पास में जमा है। तो फिर भला मैं मोबाइल से मैसेज कैसे डिलीट कर सकता हूं। इतने में पुलिस द्वारा अभिलाख सिंह को डरा धमकाकर थाने से भगा दिया गया। पंतनगर थानाध्यक्ष का उपरोक्त व्यवहार अत्यंत संदिग्ध प्रतीत होता है।
10. यह कि पंतनगर थानाध्यक्ष व पुलिस द्वारा सरकार, पुलिस-प्रशासन एवं अंग्रेजों के जमाने के पुलिस एक्ट की आलोचना करने के आरोप में की गई उपरोक्त कार्यवाही पूर्णतया गैरकानूनी एवम द्वेष भावना के तहत की जा रही उत्पीड़न की कार्रवाई है।
11. यह कि भारतीय संविधान की प्रस्तावना/उद्देशिका में ही औपचारिक रूप से भारत को समाजवादी एवं लोकतांत्रिक बनाने, नागरिकों को अपने विचार निसंकोच रखने , अभिव्यक्ति, प्रतिष्ठा की समानता देने , व्यक्ति की गरिमा सुनिश्चित कराने का संकल्प लिया गया है। संविधान का अनुच्छेद 19 (2) (ए) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की घोषणा करता है। उपरोक्त प्रकरण से भी स्पष्ट है कि उपरोक्त घोषणाएं औपचारिक ही प्रतीत हो रही हैं। भारत में आज भी नागरिकों के प्रति भेदभाव किया जा रहा है। पंतनगर थाना पुलिस का उपरोक्त व्यवहार भारतीय संविधान का खुला उल्लंघन है।
12. यह कि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 1962 में केदारनाथ सिंह बनाम स्टेट ऑफ बिहार के केस में सुनवाई करते हुए स्पष्ट व्यवस्था दी कि सरकार एवं प्रशासन की आलोचना करने अथवा कमेंट करने भर से देशद्रोह का मुकदमा नहीं बनता। एक नागरिक को सरकार एवं उसकी नीतियों की आलोचना करने का अधिकार है।
इसी तरह से सुप्रीम कोर्ट की संविधानिक पीठ ने 1995 में बलवंत सिंह बनाम स्टेट ऑफ पंजाब केस में व्यवस्था दी थी कि महज नारेबाजी किए जाने से राष्ट्रद्रोह का मामला नहीं बनता है। इसमें दो लोक सेवकों द्वारा देश के खिलाफ एवं खालिस्तान के पक्ष में नारे लगाए थे।
इसी प्रकार से वर्ष 2011 में भी सुप्रीम कोर्ट द्वारा इन्द्रा दास बनाम असम सरकार मामले सहित कई अन्य मामलों में भी इसी तरह की व्यवस्था दी थी।
13. यह कि सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त व्यवस्थाओं के बावजूद भी पंतनगर थाना पुलिस द्वारा अभिलाख सिंह के साथ में उपरोक्त दमनकारी कृत्य किया जा रहा है। जो कि सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त आदेशों का खुला उल्लंघन है।
14. यह कि नवंबर 2019 में भारत के गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लखनऊ में यूपी पुलिस मुख्यालय में आयोजित 47 वीं ऑल इंडिया साइंस कांग्रेस के समापन समारोह में स्वयं ही कहा था कि पुलिस एक्ट ब्रिटिश काल में बनाए गए हैं। इसलिए इनमें आमूलचूल परिवर्तन कर आज और कल के भारत के भविष्य के अनुरूप निर्मित किया जाएगा। वहीं अभिलाख सिंह द्वारा भी पुलिस एक्ट को ब्रिटिश काल का बताकर आलोचना किये जाने पर पंतनगर पुलिस द्वारा उनका उत्पीड़न किया जा रहा है। पोस्ट की तीन लाइनें इस रूप में अस्पष्ट हैं कि क्या पुलिस व प्रशासन मानता है कि वह पूंजीपति वर्ग का पुलिस-प्रशासन है। यदि नहीं है तो उसे क्यों व क्या आपत्ति है ? यदि वह मुकदमा दायर कर रहा है तो यह एक रूप में इसी बात को मान लेना है। पुलिस-प्रशासन को इसके उलट यह कहना चाहिए कि नहीं वह पूंजीपतियों का पुलिस-प्रशासन नहीं है। बल्कि सभी भारतीयों का है। और इसे अपने व्यवहार में स्थापित करना चाहिए। इसके उलट पुलिस द्वारा श्री अभिलाख सिंह पर देशद्रोह जैसे संगीन मामलों में मुकदमा दर्ज कर उन्हें आजीवन कारावास की सजा दिलाने की कवायद की जा रही है।
महोदय इससे स्पष्ट हो रहा है कि भारत में आज भी सत्ताधारियों एवं आम मजदूरों के साथ में भेदभाव पूर्ण नीति अपनाई जा रही है। आम नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों को औपचारिक रूप से भी छीना जा रहा है।
15. यह कि भाजपा, कांग्रेस समेत सभी पार्टियां एक-दूसरी पार्टी की सरकारों की आलोचना करते रहती हैं। हमारे देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तो अक्सर अपने भाषणों में यह कहते हुए सुने जाते हैं कि भारत में पिछले 70 सालों में कांग्रेस राज में पूंजीपतियों की सरकार थी, आम आदमी हाशिये पर रहा। वहीं विपक्षी पार्टी कांग्रेस के राहुल गांधी वर्तमान भाजपा सरकार को कारपोरेटों की सरकार बताते हैं। इसी तरह से अन्य पार्टियां भी विरोधी पार्टियों की सरकारों की खूब आलोचना करती रहती हैं।
वहीं अभिलाख सिंह द्वारा भी भारत में अब तक पूंजीवादी सरकारों के काबिज होने की बात की तो उन पर राजद्रोह का मुकदमा लगाने की साजिश रची जा रही है। ऐसे में यह प्रश्न उठता है कि क्या भारत में आम जनता को समानता का अधिकार प्राप्त है? 16 .यह कि विभिन्न पार्टियों से जुड़े कट्टरपंथियों खासकर हिन्दू फासीवादियों द्वारा अल्पसंख्यकों खासकर मुस्लिम अल्पसंख्यकों के खिलाफ सोशल मीडिया में धार्मिक उन्माद एवं वैमनस्य की भावना उत्पन्न कर समाज में साम्प्रदायिक जहर घोल विभिन्न समुदायों के बीच नफरत व कटुता उत्पन्न कर देश की एकता को खतरे में डालने वाले अवांछित तत्वों के खिलाफ पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही न की जा रही है क्योंकि ये लोग रसूखदार लोग हैं ,सत्ताधारियों से इन्हें पूर्ण संरक्षण प्राप्त है शासक वर्गीय पार्टियों के आई टी सेल में इस तरह के पोस्टों की भरमार लगी रहती है ।कोरोना महामारी के दौरान भी यह घृणित कार्य निरन्तर जारी है । वहीं अभिलाख सिंह द्वारा सरकार ,पुलिस प्रशासन की जनता के दृष्टिकोण से आलोचना करने एवं समाजवाद की बातें करने मात्र से ही पुलिस द्वेष भावना के तहत उनका उत्पीड़न कर रही है ।पुलिस का यह व्यवहार समाज में धार्मिक उन्माद उत्पन्न कर विभिन्न समुदायों के बीच धार्मिक कटुता एवं नफरत पैदा कर देश की एकता को खतरे में डालने वाले असमाजिक तत्वों के मनोबल बढ़ा रहा है ।वहीं अभिलाख सिंह जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं ,देश , समाज व इंसानियत से प्यार करने वाले लोगों के मनोबल को तोड़ने की साजिश प्रतीत हो रही है ।
17. यह कि पंतनगर थाना पुलिस के उपरोक्त व्यवहार से यह प्रश्न भी उठ खड़ा होता है कि एक मजदूर को, एक आम नागरिक को वास्तविक अर्थों में समानता के अवसर प्राप्त हैं? सरकारों एवं व्यवस्था की आलोचना करने का वास्तविक अर्थों में कोई अधिकार प्राप्त है?
18. यह कि नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा श्रम कानूनों की व्यापक स्तर पर पहले आलोचना की। तत्पश्चात उनमें मजदूर विरोधी संशोधन किये गये। यह प्रक्रिया जारी है ।
वहीं अभिलाख सिंह द्वारा सरकार, पुलिस एवं सरकार की नीतियों की आलोचना करना पंतनगर पुलिस को राजद्रोह प्रतीत हो रहा है।
इस प्रकरण से भी यही प्रतीत हो रहा है कि भारत में पूंजीपति वर्ग, रसूखदारों, सत्ताधारियों एवं शासकवर्गीय पार्टियों के नेताओं को देश के संविधान, कानूनों, व्यवस्था, सरकारों की आलोचना करने का पूर्ण अधिकार है परंतु वहीं एक मजदूर, एक आम आदमी जब आम जनता के दृष्टिकोण से यही काम करता है तो यह पुलिस समेत व्यवस्था के कर्णधारों को राजद्रोह प्रतीत होने लग जात है ।
अभिलाख सिंह जैसे सामाजिक कार्यकर्ताओं को सबक सिखाने के उददेश्य के तहत पुलिस द्वारा राजद्रोह जैसी संगीन धाराओं के तहत कार्यवाही की जाती है। ऐसे में आम जन यह सोचने को विवश हो जाता है कि यह कैसी लोकतांत्रिक व्यवस्था है जिसमें रसूखदार लोगों को अपनी बात कहने का पूर्ण अधिकार प्राप्त है, वहीं एक मजदूर, एक आम नागरिक पर राजद्रोह का मुकदमा दर्ज कर आजीवन कारावास की सजा दी जाती है ?
19. यह कि उपरोक्त बिंदुओं से पूर्णतया स्पष्ट है कि पंतनगर थाना पुलिस भारतीय संविधान एवं सुप्रीम कोर्ट के उपरोक्त निर्णयों का खुला उल्लंघन कर गैरकानूनी रूप से अभिलाख सिंह का उत्पीड़न कर रही है। न्याय हित में इस पर रोक लगाना अति आवश्यक है।
अतः महोदय से निवेदन है कि उपरोक्त प्रकरण में तत्काल हस्तक्षेप कर अभिलाख सिंह के उपरोक्त उत्पीड़न पर रोक लगा उनके विरुद्ध राजद्रोह की उपरोक्त अन्याय पूर्ण कार्यवाही पर रोक लगा न्याय हित में कार्य करें।
(धन्यवाद)
आवश्यक कार्यवाही हेतु प्रेषित
1. वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक महोदय , रुद्रपुर जिला उधम सिंह नगर
2. जिलाधिकारी महोदय रुद्रपुर जिला उधम सिंह नगर
भवदीय
इंकलाबी मजदूर केंद्र
ठेका मजदूर कल्याण समिति
क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन
प्रगतिशील महिला एकता केन्द्र
परिवर्तनकामी छात्र संगठन

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