लॉकडाउन में नौकरी से न निकालने के शासन के आदेश को दिखाया ठेंगा, कर्मचारी को निकाला

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लखनऊ: बाराबंकी शहर के हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज कालेज सफेदाबाद प्रबंधन ने बिना बताए एक कर्मचारी की सेवा की समाप्त, निकाले गए कर्मचारी ने सीएम योगी, पीएम मोदी, जिलाधिकारी सहित आलाधिकारियों से मेल ट्वीट करके मामले की शिकायत की है।

कोरोना वायरस (Coronavirus) महामारी के चलते हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में प्रभावित है। भारत में लॉकडाउन चल रहा है। हर राज्य की सीमाएं सील है। हर व्यक्ति परिवार सहित घरों में बंद है। उसे सिर्फ रोजी-रोटी की चिंता सता रही है। इस बीच किसी की नौकरी चली जाए तो उसके परिवार पर संकट मंडराना शुरू हो जाएगा।

भूखों मरने की स्थिति उपत्पन्न हो जाएगी। इस परिस्थिति को देखते हुए सरकार ने सभी उद्योगपतियों, संस्थान के मालिकों सहित अन्य प्रतिष्ठान संचालकों से अपील की थी कि इस विपरित परिस्थिति में अपने किसी भी कर्मचारी को नौकरी से न निकालें और उनका वेतन भी न रोकें।

इसके बावजूद बाराबंकी शहर के हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज कालेज सफेदाबाद प्रबंधन द्वारा मार्च माह के वेतन मे कटौती किया गया जिसका प्रतिक्रिया किया गया तो बिना बताए उक्त महिला कर्मचारी की सेवा समाप्त कर दी गई। ये पिछले 7 माह से कर्मचारी के रूप में अपनी सेवाएं दे रही थी। इस परिस्थिति में नौकरी से निकाल देने से इन पर रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

लॉकडाउन के समय में पहले से रोजी-रोटी की समस्या से जूझ रही ये कर्मचारी अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। कर्मचारी ने इसकी शिकायत पीएम मोदी, सीएम योगी, जिलाधिकारी सहित आलाधिकारियों से मेल ट्वीट करके की है।

कोरोना वायरस महामारी के चलते भारत में लॉकडाउन है। इस परिस्थिति में सरकार द्वारा अपील की गई थी कि संस्थान के मालिक अपने किसी कर्मचारी को नौकरी से न निकालें और उनकी तनख्वाह भी न रोकें। इसके बावजूद शहर के हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज कालेज सफेदाबाद प्रबंधन द्वारा उक्त कर्मचारी को बिना नोटिस जारी किए सेवा समाप्त कर दी है।

सेवा समाप्त की जानकारी मिलने पर लखनऊ शहर की निवासिनी सुप्रियम मिश्रा ने इसकी लिखित शिकायत की है। उन्होंने पत्र में लिखा है कि पिछले 7 माह से हिंद इंस्टीट्यूट आफ मेडिकल साइंसेज कालेज सफेदाबाद मेें कार्यरत थी।

कोरोना महामारी के कारण 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और 24 मार्च से राष्ट्रीय लाक डाउन के चलते सभी संस्थान आदि बंद कर दिया गया था।

मै अपनी नौकरी यथावत मानकर चल रही थी। इसी बीच 16 अप्रैल 2020 को जब मैंने अपनी नौकरी के संबंध में प्रबंधन से चर्चा की तो उन्होंने बताया गया कि मार्च 2020 से आप का कार्य समाप्त हो चुका है।

शासन के आदेश को भी नहीं माना नीजी संस्थानो की मनमानी बढ़ती जा रही है। ये अपने कालेज के कर्मचारियों के साथ तो कभी स्कूल के बच्चों के अभिभावकों से मनमानी करते रहते हैं। कोरोना महामारी से बचने के लिए सरकार द्वारा पूरे भारत में लॉकडाउन किया गया है। इस दौरान किसी भी व्यक्ति को नौकरी से नहीं निकाले जाने का आदेश भी जारी किया गया था। इसके बावजूद भी उक्त प्रबंधन द्वारा अपने कर्मचारी को नौकरी से निकाल दिया गया है।

रिपोर्ट राजकुमार गुप्ता वाराणसी

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