राजेन्द्र प्रसाद सिंह एक विधायक नहीं झारखंड के एक हस्ताक्षर थे

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रूपा सिंह
किसी ने क्या खूब कहा है कि जो इस धरती मे जन्म लेता उसे एक न एक दिन इस धरती के सारे मोह माया को त्याग कर चले जाना पर जब कोई अपना हाथ अपनो से छुड़ाके बहुत जल्दी चला जाता है तो उस परिस्थिति को समझ पाना ना के बराबर हैं । कुछ ऐसे ही स्वर्गीय.राजेन्द्र प्रसाद सिंह भी पिछले साल 24 मई, 2020 को सबको को छोड़ कर  चले गए। झारखंड के दिग्गज नेताओं मे से एक थे । राजेंद्र बाबू को ना केवल उनके क्षेत्र के बल्कि विभिन्न जिले के लोग उन्हें उनके सरल ,हमेशा मदद करने के लिए तत्पर स्वभाव से जानते थे। उन्होंने भिन्न भिन्न तरीको से राज्य ही नही बल्कि देश की सेवा मे अपना योगदान दिया और हमेशा जरूरतमंदों की सहायता की। यूँ तो उन्हें राजनीति मे उन्हें सरल स्वभाव से सभी परिचित थे और यह भी एक कारण था कि उनके सारे विपक्षी नेता भी उन्हें अपने बड़े ही इज़्ज़त औऱ प्यार के निगाहों से देखते थे। कोई भी उनसे अगर मदद की गुहार लगता था तो वो पूर्ण रूप से उस व्यक्ति की मदद करते थे। उनका सरल व्यवहार ही तो था जिसने वज़ह से लोगों के बीच अपने जनता के वे प्रिय थे।चुनाव मे अपने विरोधी के दांत कैसे खट्टे किये जाय उन्हें भली भांति आता था। किसी भी परिस्थिति का कैसे आंकलन किया जाए राजेंद्र बाबू से बेहतर कोई नहीं समझ सकता था। आज उनकी पहली पुण्यतिथि मे लोगो के बीच उस दर्द को देखने को मिला और इससे यह देखने को मिला कि इस राज्य ने कितने महान व्यक्ति को खोया हैं। लोगो के अनुसार उनकी कमी को शब्दों बया पर पाना काफ़ी मुश्किल हैं। उनके पुण्यतिथि के अवसर पर अलग अलग जगहों पर राशन का वितरण किया गया। उनके अनोखे अंदाज को याद कर हुए सबकी आँखे नम पड गयी और नम आँखों से सभी लोगो ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए राजेंद्र बाबू अमर रहे का नारा लगाया। राजेन्द्र बाबू के दोनों बेटों के द्वारा केन्द्रीय ढोरी अस्पताल को एक मोटोराइज्ड आईसीयू बेड समर्पित किया गया और साथ ही साथ कोरोना से बचाव के लिए राहत का सामान भी बाँटा गया। झारखंड की माटी को गर्व है जिसने इस वीर पुरुष का साथ पाया। पूरे झारखंड के लोगो की तरफ से स्वर्गीय राजेंद्र बाबू को शत शत नमन।
लेखिका सेमेस्टर -3, पत्रकारिता विभाग, गोस्सनर कॉलेज, राँची की छात्रा है।

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