शिक्षा, ग्राम स्वराज और पूर्ण विकेंद्रीकरण – भारत का स्वर्णिम भविष्य

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पोस्ट कोरोना भारत के लिये एकमात्र उपलब्ध सोल्यूशन यही है कि वो अपने सबसे बड़े रिसोर्स को हारनेस करे, यानि उसके मानव संसाधनों को एकत्र कर उन्हें काम पर लगाये.
सिर्फ़ पाँच साल काम करना है और आप अगले सौ साल का भविष्य बदल सकते हैं. सिर्फ़ पाँच साल, इस देश को दोबारा पढ़ने और ट्रेनिंग देने में लगाना है और यक़ीन मानिये, इसका बजट हमारे रक्षा बजट से बहुत कम आयेगा. देखिये यह कैसे किया जा सकता है.
स्टेप १ – मानकों को तैयार कीजिये.
देश के जीवन स्तर के लिहाज़ से हर क्षेत्र में मानक तैयार कीजिये. भारत के एक नागरिक का मिनिमम जीवन स्तर कैसा होना चाहिये, इस पर काम करें. प्रत्येक सेवा क्षेत्र, पुलिस, शिक्षा, चिकित्सा, नगरीय प्रशासन, हर स्तर पर सर्विस डिलिवरी का न्यूनतम मानक तय किया जावे और फिर उसके लिये ज़रूरी सुविधाओं को जुटाया जाये.
स्टेप २ – सभी तरह की सरकारी नौकरियाँ ख़त्म की जायें
सरकार को सेना, भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा छोड़कर सभी सरकारी नौकरियों को ख़त्म कर देना चाहिये. शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस, इत्यादि सभी क्षेत्रों को स्वतंत्र निगमों के हवाले किया जाये जहां भर्ती केवल मेरिट पर हो, बिना किसी सरकारी दखल के. देश की सभी सेवाओं को सरकार से मुक्त कर दिया जाना चाहिये, रेल, बैंकिंग और अन्य सेवा क्षेत्रों सहित.
स्टेप ३ – अर्थव्यवस्था को कृषि एवं सेवा प्रधान बनाया जाये
देश को उपभोक्तावाद त्याग कर प्रकृति के साथ चलने की ज़रूरत है. ये ६० दिन का अवकाश पूरे समाज को यह रिअलाईज करा देगा कि हमें ठहरने की ज़रूरत है. हमें अपनी अर्थव्यवस्था को पुनः गांधी के मार्ग पर डालकर, कृषि और सेवा प्रधान बनाने की ज़रूरत है. इससे विदेशी सामान पर निर्भरता कम होगी और हम जीवन स्तर को ऊपर उठा पायेंगे.
स्टेप ४ – मानकों के लिहाज़ से प्रशिक्षण
हर क्षेत्र में तय मानकों के हिसाब से लोगों की हायरिंग की जाये और प्रशिक्षण दिया जाये. हमारे देश में एक तरफ़ बेरोज़गारी है तो दूसरी तरफ़ प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की कमी. इसे पूरा करने के लिये एक ऐसा ढाँचा तैयार किया जाये जहां सरकारी दखल के बग़ैर हर प्रांत अपनी ज़रूरतें अपने ही लोगों के द्वारा पूर्ण कर सके.
स्टेप ५ – शिक्षकों को तैयार कीजिये
देश भर से चुने हुए एक लाख शिक्षकों को ट्रेनिंग देकर, रटंत शिक्षा पद्धति को छोड़कर व्यवहारिक शिक्षा देने के लिये तैयार किया जाना चाहिये. इसके लिये अलग से एक फ़ाऊंडेशन बनाया जाये जो केवल देश में शिक्षकों की ट्रेनिंग पर कार्य करे.
ये एक लाख शिक्षक ऐसे स्कूल लीडर्स होंगे जो अपने अपने क्षेत्रों में वापस आकर नये शिक्षक तैयार करेंगे. यह ट्रेनिंग इंटेंसिव हो, जिसमें इन शिक्षकों को एक आर्मी मेजर के समकक्ष ट्रेनिंग दी जाये और उसी स्तर पर इसे तैयार किया जाये. इसके लिये देश में संसाधन मौजूद हैं, कुछ नया नहीं करना पड़ेगा.
स्टेप ६ – राज्य सरकारों को अधिक स्वायत्तता
पिछले २०-२५ सालो में देश में सत्ता का केंद्रीयकरण होने के कारण राज्यों की स्वायत्तता कम से कम होती गई है. इस पुनर्स्थापित कर राज्यों को स्वयं को आगे बढ़ाने की ज़िम्मेदारी देना चाहिये. स्थानीय ज़रूरतों, संसाधनों और प्रियोरिटीज के हिसाब से हर राज्य को स्वयं के कार्यक्रम अलग से बनाने चाहिये.
स्टेप ७ – सभी तरह की सरकारी नौकरियाँ ख़त्म की जायें
सरकार को सेना, भारतीय प्रशासनिक सेवा और भारतीय विदेश सेवा छोड़कर सभी सरकारी नौकरियों को ख़त्म कर देना चाहिये. शिक्षा, चिकित्सा, पुलिस, इत्यादि सभी क्षेत्रों को स्वतंत्र निगमों के हवाले किया जाये जहां भर्ती केवल मेरिट पर हो, बिना किसी सरकारी दखल के. देश की सभी सेवाओं को सरकार से मुक्त कर दिया जाना चाहिये, रेल, बैंकिंग और अन्य सेवा क्षेत्रों सहित.
स्टेप ८ – शिक्षा संपूर्ण रूप से फ़्री हो
देश में सभी लोगों के लिये स्कूल और कॉलेज की शिक्षा पूर्ण रूप से शुल्क मुक्त की जावे. शिक्षा ऑनलाईन हो, किसी भी एफिलिएशन से मुक्त हो. बच्चों को केवल चार स्तर पर परीक्षा देनी पड़े – आठवीं, दसवीं और बारहवीं. इसके अतिरिक्त कॉलेज में प्रवेश के लिये एक सिंगल देश व्यापी मुक्त परीक्षा हो, जिसे कोई भी कभी भी ऑनलाईन दे सके. एक मेरिट लिस्ट बने जिससे देश के सभी शिक्षण संस्थानों में प्रवेश मिले.
स्टेप ९ – लैंगिक, जातिगत और धार्मिक आरक्षण को ख़त्म किया जाये – आनुपातिक रूप से सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित की जाये. इसके साथ ही महिलाओं को समान रूप से भागीदारी दी जावे. महिलाओं को पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिला कर कार्य करना होगा.
स्टेप १० – धर्मनिरपेक्ष समाज बनें – धर्म को घर की चहारदीवारी में बंद करें.
सभी तरह के सार्वजनिक धार्मिक जलसे बंद किये जायें. ईद से लेकर कुंभ तक सरकारी दखल बंद किया जाये. धर्म को पूर्ण रूप से व्यक्तिगत मामला बना दिया जाये.
स्टेप ११ – ग्राम स्वराज के सपनों को हक़ीक़त में बदलिये
शहरीकरण को तुरंत रोकना होगा. हर गाँव को अपने आप में परिपूर्ण करें. वहाँ हर सुविधा को पहुँचाये. यक़ीन मानिये यह लोगों को शहर में अकोमोडेट करने से अधिक सस्ता पड़ेगा.
यह सब करने के लिये पैसा कहां से आयेगा ? सरकारी विभागों को ख़त्म कर यदि सरकार उसी पैसे को लोगों के प्रशिक्षण में लगा देगी तब भी पैसा बच जायेगा. यदि इस कार्य को करने के लिये टेक्नोलॉजी को लेवरेज किया जाता है तो रिज़ल्ट सौ गुना हो जायेंगे, जबकि खर्च आधा हो जायेगा.
५ करोड़ लोगों को एक साल प्रशिक्षित करने और स्टायपेंड देने में अधिकतम खर्च पाँच लाख प्रति व्यक्ति आयेगा, जो कुल मिला कर ५० खरब से कम रहेगा.
यदि उपरोक्त सुझावों को हम अमल कर पाये तो ५ करोड़ से अधिक रोज़गार तैयार होंगे. इसके साथ ही एक कर्मठ सिटीजनरी तैयार होगी जो देश को आगे बढ़ाने में सक्षम हो.
हमें ठहरने की ज़रूरत है. संपूर्ण रिसेट एक समाज के रूप में, व्यवहार में, विचार में, आचार में. ज़िम्मेदारी डिवेलप करने की ज़रूरत है, विश्व, देश, समाज और धर्म के प्रति. हमें एक स्टैंडर्ड्स बेस्ड समाज का निर्माण करना है जिसके लिये हमें एक ऐसा नेतृत्व चुनना होगा जो दृढ़ता के साथ कार्य कर सके. एक ओर पूँजीवादी व्यवस्था से लोहा ले सके तो दूसरी ओर धार्मिक और मानसिक जड़ता से भी छुट्टी दिला सके.
आनंद जैन

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