बांग्लाभाषी हिंदी लेखिका जयश्री पुरवार से राजीव कुमार झा की बातचीत

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प्रश्न . आप बांग्लाभाषी हिंदी लेखिका हैं आपका हिंदी लेखन से लगाव कैसे कायम हुआ ? अपने बचपन घर परिवार के बारे मेंबताएं ?

उत्तर – कक्षा पाँच की पढ़ाई अधूरी छोड़कर मुझे चंदननगर ( बंगाल) से उरई ( उ. प्र.)आना पड़ा पिता-माता ,भाई-बहनों के साथ । कक्षापाँच में हर शनिवार को हिंदी का क्लास लगता था अतः मुझे कोई असुविधा नही हुयी।कक्षा छै से पढ़ाई हिंदी माध्यम में ही हुयी ।घर मेंबांग्ला पत्रिकाएँ आती रही अतः बांग्ला साहित्य से सम्पर्क बना रहा ।कक्षा आठ से नियमित डायरी लिखने लगी थी बांग्ला भाषा में ही तोमातृभाषा में लेखन की भी आदत बनी रही ।ज़्यादातर हिंदी में ही लेखन कार्य होता रहा । समझ लीजिए कि हिंदी और बांग्ला दोनों मेरेलिए मातृभाषा के समान है ।

2..आपने बांग्ला और हिंदी कविताओं का एक दूसरी भाषाओं में अनुवाद किया है , उसके बारे में विस्तार में बताएं ?

अस्सीवें दशक की शुरुआत में जब ‘ नव अंकुर ‘ हिंदी मासिक पत्रिका का सम्पादन कर रही थी रवीन्द्रनाथ और नज़रुल के गीतों काअनुवाद पत्रिका के लिए करने लगी थी ।कभी अपना नाम नही दिया ।फिर बांग्ला और हिंदी में अनुवाद अन्य पत्रिकाओं में प्रकाशित होतीरही । पहली अनुवादित किताब अंग्रेज़ी से हिंदी में थी ‘मैं हिटलर की दासी थी ‘2011 प्रकाशित ।इन्ही दिनो दो किताबें हिंदी से बांग्ला मेंअनुवाद किया।कुछ कारणों वश एक 2017 में प्रकाशित हो पायी और एक सुप्रसिद्ध पुस्तक अभी तक अप्रकाशित है ।

2017 से मैंने अनुवाद को गम्भीरता से लिया । 2019 तक तीन वर्ष में चार कविताओं की अनुवादित पुस्तकें आ चुकी हैं जिनके प्रमुख हैंशंख घोष और जय गोस्वामी की कविताओं का संग्रह है। एक प्रकाशनाधीन है ।अनुवाद कार्य में मुझे विशेष आनंद आता है । अनुवादकरते समय मूल कविता की मौलिकता, मधुरता , उसका छंद आदि सभी को बनाए रखने का हर सम्भव कोशिश करती हूँ जिससे उन्हेंपढ़कर मूल कविता का सा आभास हो सके ।

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3. . आपने राजनीति विज्ञान का अध्ययन किया है और समाजवाद पर किताब भी लिखी है . भारत में लोकतंत्र और समाजवाद कीउपलब्धियों के बारे में बताएं।

लगभग 42 साल तक राजनीति विज्ञान पढ़ाया । पीएचडी और डी लिट भी किया । पुस्तक “ साम्यवाद को चुनौतियाँ “ गूगल बुक्स में है। आज भारत में दुनिया का सबसे बड़ा सफल प्रजातंत्र क़ायम है ।इस विशाल देश में सत्रह महानिर्वाचन सफलता पूर्वक सम्पन्न हो चुकेहैं ।आम जन के पास स्वतंत्रता और समानता के अधिकार उपलब्ध होना हमारे लोकतंत्र की बड़ी उपलब्धि हैं ।पर एक मजबूत विपक्ष कान होना भारतीय लोकतंत्र की एक बड़ी कमी है । हमने न केवल संविधान द्वारा समाजवाद को स्वीकारा बल्कि व्यवहार में भी उसे लागूकरने की कोशिश की ।पर सच्चे समाजवाद के रास्ते पर चलने के लिए हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती है आधुनिक पूंजीवाद के साथसामंजस्यता ।

.4…आधुनिक बांग्ला काव्य का हिंदी काव्य लेखन पर क्या प्रभाव पड़ा ?

मेरी समझ में कोलकाता ब्रिटिश शासन का केंद्र होने से यहाँ नवजागरण के युग में काव्य को नयी गति मिली जिसका आधुनिक हिंदीकाव्य पर गहरा प्रभाव पड़ा । आधुनिक बांग्ला काव्य साहित्य कारों में रवींद्रनाथ , जीवनानंद, बंकिमचंद्र, शरतचंद्र आदि के लेखन नेहिंदी साहित्य को विस्तृत सीमा तक प्रभावित किया है ।

5…. आपने संसार के विविध देशों की यात्राओं से मानव सभ्यता संस्कृति की रचनात्मकता को निकट से देखा समझा है .आज संसार केसमक्ष किस तरह के संकट को चुनौती के रूप में देखती हैं ?

उत्तर – देश और अनेक विदेशों की विस्तृत यात्राएँ की और उनकी सभ्यता और संस्कृति की विविधता को नज़दीक से देखा भी।जहाँ तकसंसार के सामने चुनौती का सवाल है वैश्वीकरण के युग में सभी देशों की जीवन पद्धति पश्चिमी संस्कृति से अनुप्रेरित होती जा रही है ।देश अपनी निजी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं जो दुखद है ।अर्थव्यवस्था , संचार और यातायात के साधनों के विकास ने जहाँ दुनिया केदेशों को परस्पर जोड़ा है वहीं देशों के बीच परस्पर प्रतिस्पर्धा और अविश्वास बढ़ा है ।वर्तमान प्राकृतिक आपदा से निपटने में देश परस्परसहायता कर रहे हैं यह शुभ लक्षण हैं । शायद इस विपदा के बाद विश्व व्यवस्था एक नए रूप में सामने आए ।

.6… अपने यात्रा वृत्तांत लेखन के बारे में बताएँ ?

उत्तर – भ्रमण का विशेष शौक़ रहा । अपने देश के कोने कोने की यात्रा की और विदेशों की भी । पर जितनी यात्राएँ की उस हिसाब सेलिखा कम गया ।निरंतर सामाजिक कार्यों से जुड़े रहने के कारण लेखन को कम ही समय दे पायी ।यात्राएँ मेरी ज़्यादातर जाग्रतघुमक्कड़ी रही ।अनेक यात्रा संस्मरण प्रकाशित है , कुछ अप्रकाशित और कुछ अधूरे । पहली अमेरिका यात्रा की डायरी भी लिखी पड़ीहै ।अब सभी संस्मरणों को एक साथ पुस्तक के रूप में प्रकाशन पर काम कर रही हूँ जिसमें कुछ नये संस्मरण भी जुड़ेंगे ।

7.. . अपने प्रिय रचनाकारों के बारे में बताए ।

उत्तर – बांग्ला में मुझे बंकिम और शरद के उपन्यासों का मस्तिष्क पर अमिट प्रभाव है जिन्हें मैंने कक्षा आठ और नौ में पढ़ने दौरान छुप छुपकर पढ़े थे । आशापूर्णा , महाश्वेता , विभूति भूषण ,ताराशंकर को भी ख़ूब पढ़ा ।बांग्ला कवियों में सबसे प्रिय हैं रवीन्द्र और नज़रुल।वर्तमान में शंख घोष , जयगोस्वामी , अनुराधा महापात्र, सुबोध सरकार आदि कवि मुझे प्रिय है जिनकी कविताओं का मैंने अनुवाद कियाहै ।

8…आप पुरानी पीढी की लेखिका हैं और नये रचनाकारों से क्या अपेक्षा करती हैं ?

कोई भी रचनाकार स्वेच्छा से कुछ भी लिखें उनपर ही छोड़ देना उचित है ।पर ज़रूरी है कि जो भी लिखें विवेक से , हृदय से , दिखावा केलिए नहीं ।और जो भी लिखें पूर्वग्रह से मुक्त होकर अपनी वास्तविक अनुभूति को लिखें ।सच और केवल सच ही लिखें ऐसा मुझे लगताहै ।

9….देश में हिंदी के प्रसार और इसके महत्व को क्या फिर से रेखांकित करने की जरूरत महसूस करती हैं ?

उत्तर – सालों से हिदी दिवस, या पखवारा या महीना मनाते रहने के बाद भी उस जरूरत की पूर्ति नहीं हो सकी जिसके लिए इतने समारोहधूमधाम से मनाते आ रहे हैं ।स्वयं हिंदी भाषी भी इसके लिए काफी सीमा तक जिम्मेदार हैं जो स्वयं ही अपनी भाषा को हेय दृष्टि सेदेखने के आदी होते जा रहे हैं । हिंदी को एक सम्मानपूर्ण स्थान देने के लिए स्वयं हिंदीभाषियों को ही सचेष्ट होना होगा ।स्वयं अपनेजीवन में हिंदी भाषा का अधिकतम प्रयोग करना होगा ।

10 . . . लेखन के अलावा अपनी अन्य अभिरुचियों के बारे में बताएं ?

बचपन से जहाँ मुझे विभिन्न कलाओं के प्रति रुचि रही , विशेष कर बाटिक चित्र कला में ।वहीं नियति मुझे खींच ले गयी सामाजिककार्यों की ओर। वर्ष १९७५ , अंतर्राष्ट्रीय महिला वर्ष में जनपद जालौन महिला समिति की संयोजिका बना दी गयी । यहीं से सामाजिककार्यों का जीवन शुरू हुआ ।बाद में ज़िला महिला मण्डल ( कल्याणी ) के अध्यक्ष , भारत विकास परिषद के अध्यक्ष , विभिन्न ज़िलासमितियों की संयोजिका आदि के रूप में निरंतर महिला उत्थान के सामाजिक कार्यों से जुड़ी रही । साक्षरता अभियान, सामाजिकिकुप्रथाओं से सम्बंधित विचार गोष्ठी , चिकित्सा शिविर, सेवा और कला प्रशिक्षण शिविर के आयोजन के अलावा महिला उत्पीड़न केढेरों मामलों को सुलझाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी ।


1987 मे लेखन , सम्पादन व सामाजिक कार्यों के लिये भारतीय जेसीज “ देश के दस विशिष्ट युवा” पुरस्कार ।

1996 मे साक्षरता अभियान के लिये विशेष पुरस्कार,उत्तर प्रदेश प्रशासन के शिक्षा मंत्री द्वारा ।

2013 मे अनुवाद के क्षेत्र में योगदान के लिये प्रशासन द्वारा “ राष्ट्रीय ऐकीकरण अलंकरण ” पुरस्कार से सम्मानित ।

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