पंजाब के 16 मज़दूर-मुलाजिम, किसान, नौजवान, छात्र संगठनों द्वारा 80 से अधिक अस्पतालों-स्वास्थ्य केंद्रों पर रोष-प्रदर्शन

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माँगें-
स्वास्थ्य विभाग से जुड़े हुए सभी पदों, सफ़ाई मज़दूरों, आशा वर्करों, नर्सों आदि सभी स्टाफ, समेत सर्विस प्रोवाइडरों/डॉक्टरों आदि को पक्की सरकारी नौकरी पर भर्ती किया जाए। खाली पदों को भरा जाए, आर.एम.पी. और इन जैसी अन्य श्रेणियों को सरकारी क्षेत्र में शामिल किया जाए। कोविड-19 के इलाज की विशेष ज़रूरतों के लिए आवश्यक सामान, स्वास्थ्य विभाग का ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में निचले स्तर तक विस्तार करना, निजी अस्पतालों को पक्के तौर पर सरकारी नियंत्रण में लेना, स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े मज़दूरों का 50 लाख रुपए का बीमा करने, पंजाब में घर वापसी कर रहे मज़दूरों, श्रद्धालुओं, सैलानियों या प्रवासी भारतीयों का स्वागत करने के लिए माहौल बनाया जाए, और उनकी जी जान से सेहत संभाल करने के लिए पहले से ही पुख़्ता प्रबंध किए जाएँ और ऐसे ही कदम पंजाब से घर वापसी करने वाले प्रवासी मज़दूरों के संबंध में भी उठाए जाने की गारंटी की जाए। कोरोना संबंधी जिम्मेदारियाँ निभा रहे पुलिस मुलाजिमों की स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी की भी माँग की गई व कर्फ़्यू के दौरान लोगों पर और प्रवासी मज़दूरों पर दमन करने वाले दोषी पुलिस अमले के ख़िलाफ़ उचित कार्यवाही की जाए। निजीकरण, वैश्वीकरण और व्यापारीकरण की नीतियों को ख़त्म किया जाए और इसके शुरुआती कदम के तौर पर समूची जन-सेवाओं जैसे जल सप्लाई, शिक्षा, बिजली और यातायात आदि में ठेका भर्ती समाप्त करके पक्की भर्ती, औद्योगिक और अन्य क्षेत्रों के मज़दूरों को पक्के रोज़गार की गारंटी दी जाए। यह ज़िम्मेदारी केंद्र और राज्य सरकारें उठाएँ। कोरोना की महामारी के बड़े खर्चे की पूर्ति के लिए कॉर्पोरेट घरानों और बड़े भूमिपतियों के कारोबारों पर विशेष टेक्स लगाकर की जाए और सरकारी खजाने का खुलकर इस्तेमाल किया जाए।

ये प्रस्ताव भी पारित किए गए –
संगठनों द्वारा महाराष्ट्र के औरंगाबाद के नज़दीक भूखे प्यासे, पैदल, पुलिस-प्रशासन का दमन झेलते हुए अपने घरों की ओर जाते समय दर्दनाक ट्रेन हादसे का शिकार हुए 16 प्रवासी मज़दूरों की मौत और सैकड़ों अन्य मज़दूरों पर दुख व्यक्त करते हुए उनके वारिसों को 50-50 लाख रुपए का मुआवज़ा और जीवन बसर करने की गारंटी और कोरोना वायरस की आड़ में केंद्र सरकार के इशारे पर गुजरात, महाराष्ट्र, यू.पी., मध्य प्रदेश, राजस्थान समेत 7 राज्यों द्वारा श्रम क़ानूनों को ख़त्म करने की निंदा करते हुए ये मज़दूर विरोधी फैसले वापस लेने के प्रस्ताव भी पारित किए गए।

शामिल संगठन –

नौजवान भारत सभा (ललकार), भारतीय किसान यूनियन (एकता उगराहाँ), टेक्सटाइल-हौज़री कामगार यूनियन, किसान संघर्ष कमेटी पंजाब, कारख़ाना मज़दूर यूनियन, जल सप्लाई एवं सेनिटेशन कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन पंजाब रजि. नं 31, पंजाब खेत मज़दूर यूनियन, पी.एस.यू. (शहीद रंधावा), टेक्नीकल सर्विसिज़ यूनियन, नौजवान भारत सभा, पी.एस.यू. (ललकार), मोल्डर एंड स्टील वर्कर्ज़ यूनियन, गुरू हरगोबिंद थर्मल प्लांट लहरा मोहब्बत ठेका मुलाज़िम यूनियन आज़ाद, पॉवर कॉम एंड ट्रांस्को ठेका मुलाज़िम यूनियन, ठेका मुलाज़िम संघर्ष कमेटी पॉवर कॉम ज़ोन बठिंडा और पंजाब रोडवेज़ /पनबस कंट्रैक्ट वर्कर्ज़ यूनियन

– मुक्ति मार्ग

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