तमाम जनवादी ताकतें मोदी की फासिस्ट सत्ता के खिलाफ प्रतिवाद को सड़क पर आएं

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विशद कुमार
     झारखंड के धनबाद के रणधीर वर्मा चौक पर आज 5 अगस्त को मासस, भाकपा माले एवं मार्क्सवादी युवा मोर्चा के संयुक्त तत्वावावध  में महंगाई,  पेगासस जासूसी, शिक्षा, बेरोजगारी आदि मांगों को लेकर एक दिवसीय उपवास धरना दिया गया। धरना काार्यक्र की अध्यक्षता नकुल देव सिंह एवं संचालन मायुमो जिला अध्यक्ष पवन महतो ने की। धरना में मुख्य रूप से मासस केंद्रीय महासचिव हलधर महतो उपस्थित थे। धरना को संबोधित करते हुए हलधर महतो ने कहा कि पेगासस जासूसी से लेकर झारखंड में हेमंत सरकार को गिराने के लिए विधायकों की खरीद बिक्री का हथकंडा तक, भारत के संवैधानिक गणतंत्र के खिलाफ, मोदी सरकार की बड़ी साजिश का संकेत दिखाई पड़ रहा है। हलधर महतो ने कहा कि इस धरना के माध्यम से तमाम विपक्षी ताकतों, मानव अधिकार संगठनों, आंदोलनकारी ताकतों और नागरिकों से इसके खिलाफ प्रतिवाद की अपील करते हुए आज के दिन संविधान के खिलाफ साजिश के प्रतिवाद में पेगासस कांड की न्यायिक जांच की मांग को लेकर यह एक दिवसीय उपवास धरना आयोजित की गई है। का0 महतो ने आगे कहा कि कोरोना काल में ऑक्सीजन के अभाव में मरीजों के मरने की घटना से इंकार कर मोदी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि कोरोना जनसंहार के भुक्त भोगियों के प्रति वह किस हद तक संवेदनहीन हैैं। कोरोना और मोदी सरकार की जुड़ावी मार से स्थिति भयावह है। महंगाई-बेरोजगारी देश में भारी तबाही मचा रही है। गरीबों के सामने भुखमरी और कुपोषण की समस्या है। राशन को लेकर हमें गरीबों के आंदोलन को तेज करना होगा। हमें जनता को जागरूक करना होगा कि भोजन और स्वास्थ्य उनका अधिकार है इसे लेकर हम पंचायत स्तर पर इस माह में जन सुनवाई कार्यक्रम आयोजित करेंगे। हम कोरोना काल में मारे गए परिजनों के लिए मुआवजे का आंदोलन को तेज करेंगे और हर एक रविवार को अपनों की याद कार्यक्रम के जरिए व्यापक लोगों तक सरकार की संवेदनहीनता का पर्दाफाश करेंगे।
माले नेता नकुल देव सिंह ने कहा कि मानव अधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीति आंदोलनकारियों का दमन और उनकी जासूसी , देशद्रोह के मुकदमे और  झूठे मुकदमे के तहत जेल भेजना ,भारत की आजादी की बुनियाद पर हमले का हिस्सा है।  अभी हाल ही में संसद में आवश्यक रक्षा सेवा की विधेयक 2021 मोदी सरकार ने पेश किया है। हम तत्काल आयुध कारखानों के निजीकरण का विरोध कर रहे हैं। मजदूरों के हड़ताल को प्रतिबंधित करने पर लक्षित है लेकिन इसका इस्तेमाल समग्र तौर पर मजदूर के हड़ताल के अधिकार पर हमला है।  इसमें दिए गए  प्रावधान सरकार को किसी भी उद्योग या क्षेत्र को आवश्यक रक्षा सेवा में लाने का अधिकार देता है हम मांग करते हैं कि सरकार अविलंब इस विधेयक को वापस ले, सार्वजनिक क्षेत्रों के निजीकरण का हम पुरजोर विरोध करते हैं। इसके खिलाफ हम आंदोलन कर रहे हैं। मजदूर कर्मचारी आंदोलन का हम समर्थन करते हैं। हम रसोईया, सहिया, आंगनबाड़ी सेविकाओं, पारा शिक्षकों के आंदोलन के साथ हैं और हेमंत सरकार से मांग करते हैं कि अविलंब उनकी मांगों को पूरा करें ।
 मार्क्सवादी युवा मोर्चा के जिला अध्यक्ष पवन महतो ने कहा कि मोदी सरकार ने रोजगार के नाम पर युवाओं के साथ बड़ी ठगी की है।  रघुवर दास सरकार ने झारखंड विरोधी स्थानीयता नीति के ज़रिये झारखंड के युवाओं को नौकरी के अधिकार को भी छीन लिया है। चिंताजनक बात यह है कि हेमंत सरकार भी इस मामले में गंभीर नहीं है। हेमंत सरकार की रोजगार संबंधी घोषणा भी अखबारों और टीवी चैनलों तक ही सीमित है और सरकार इन घोषणाओं को जमीन पर उतारने के प्रति गंभीर नहीं है। महतो ने बताया कि बेरोजगारों के अविलंब नियोजन के सवाल को लेकर 15 अगस्त से लेकर 30 अगस्त तक छात्र युवाओं को गोलबंद करने का कार्यक्रम तय हुआ है। झारखंड में बेरोजगारी की मार झेल रहे युवा आज संगठित हों। देश में बेरोजगारी का आलम को देखकर ऐसा लगता है कि बेरोजगारी में देश, पूरे विश्व में अव्वल स्थान पर कायम है।  शिक्षा जो झारखंड में विगत दिनों मैट्रिक इंटरमीडिएट की रिजल्ट में जो परीक्षार्थी फेल कर दिए गए, बिल्कुल ही निराधार है। कोरोना काल में कई छात्र- छात्राओं ने परीक्षा नहीं दी है। इसमें फेल कहां से हो गये और पास में अव्वल कैसे हुआ?  यह जांच का विषय है। या तो झारखंड सरकार सभी को पास करें या इस प्रकार की गलत नीति को बढ़ावा ना दें। उन्होंने कहा कि 9 अगस्त को क्रांति दिवस पर कारपोरेट लूट के खिलाफ झारखंड बचाओ, जल जंगल जमीन बचाओ, भारत बचाओ, मोदी शाह कुर्सी छोड़ो के आंदोलन का शंखनाद होगा। धरना में मुख्य रूप से मायुमो जिलाध्यक्ष पवन महतो, राजकुमार महतो, मंटू महतो, दुलाल चंद्र बाउरी, सोनू शर्मा, श्रीधर महतो, संजय पाल, शत्रुघन पासवान, रामप्रवेश भुईया, एके प्रजापति, कार्तिक प्रसाद, आजरानी निशानी, ज्ञान उदय गोरखी, वीर भगत, सखीचंद दास, गगन दास, सुमित्रा देवी, भानुदास, महेंद्र रजवार, राम प्रसाद दास, श्रीराम विश्वकर्मा ,सीताराम कुंभकार,  भोजोहोरी महतो, विनोद कालिंदी, निमाई रजक आदि शामिल थे।

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