मजदूरों को भूख से निजात दिलाने के लिए लाई गईं सरकारी योजनाएं बन कर रह गई हैं हाथी का दाँत

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विशद कुमार

झारखंड में दिन प्रति दिन कोरोना वायरस से संक्रमित लोगों की संख्या बढ़ रही है। इस वायरस को फैलने से रोकने की सरकार कोशिश में कुछ खास सफलता नजर नहीं आ रही है। आपदा प्रबंधन के नाम पर प्रशासनिक अमला पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक, खासकर खाद्य आपूर्ति से जुड़े लोग लूटनें में लगे हैं। कुछेक जगहों को छोड़ कर राज्य के लगभग सभी जिले गरीबों व बेरोजगार हो चुके मजदूरों को भूख से निजात दिलाने के लिए लाई गईं सरकारी योजनाएं केवल हाथी का दांत बनकर रह गई हैं।
सरकारी घोषणा है कि लॉक डाउन के दौरान राज्य में कोई भूखे न रहे, इस हेतु विभिन्न योजनाओं के तहत लोगों तक भोजन और खाद्य सामग्री पहुचाने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्य में मुख्यमंत्री दीदी किचन योजना बहुत ही कारगर सिद्ध हो रही हैं । इस योजना के तहत राज्य के विभिन्न जिलों में 6,660 दीदी किचेन द्वारा पिछले 24 घंटे में 4,91,478 लोगों को खाना खिलाया गया है। दीदी किचेन द्वारा लोगों को पका हुआ गर्म भोजन खिलाया जाता है। भोजन देते समय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जाता है। खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग द्वारा लोगों तक विभिन्न योजनाओं के तहत राशन एवं खाना पहुँचाने का कार्य किया जा रहा है। विभाग द्वारा प्राप्त आंकड़ो के अनुसार अब तक 1,73,803 लोगों तक अनाज पहुंचा दिया गया है। वहीं नन पीडीएस के तहत 2,13,316 लोगों तक अनाज उपलब्ध करा दिया गया है। दाल भात के विभिन्न योजनाओं में अब तक 71,66,277 लोगों को खाना खिलाया गया है। सरकार द्वारा चलाये जा रहे विभिन्न राहत कैम्पों में 1,81,899 प्रवासी मजदूरों को खाना खिलाया जा रहा है। एनजीओ एवं वॉलिंटियर्स की 872 टीमों द्वारा राज्य में विभिन्न जगहों पर 29,20,724 लोगों को खाना खिलाया गया है। साथ ही आकस्मिक राहत पैकेट का वितरण भी जरूरतमंदों के बीच किया जा रहा है। अबतक 46,180 लोगों तक विशेष राहत सामग्री के पैकेट पहुंचाये गए हैं। बावजूद रोज ब रोज जरूरतमंदों को राशन नहीं मिलने व भूखे रहने के समाचार मिल रहे हैं।

दूसरी तरफ झारखंड में कोरोना वायरस लगातार पैर पसारता जा रहा है। रविवार 19 अप्रैल को सात नये कोरोना संक्रमित मरीजों की पुष्टि हुई है। इनमें पांच रांची के हिंदपीढ़ी के हैं, जबकि एक बेड़ो और एक सिमडेगा का है। इन सात नये मरीजों को मिलाकर झारखंड में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की कुल संख्या 41 हो गयी है। इसके अलावा 18 अप्रैल को बरियातू निवासी 75 वर्षीय सेवानिवृत्त अधिकारी के भी कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हो चुकी है। उनकी मौत गुरुग्राम स्थित मेदांता में हुई है, इसलिए इस केस को झारखंड के आंकड़े में नहीं जोड़ा जा रहा है। इस केस को जोड़ने पर झारखंड में कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या 42 हो जायेगी।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार अभी तक राज्य में 4,464 लोगों का कोविड-19 टेस्ट लिया गया है, जिसमें से 34 पॉजिटिव पाए गये एवं 3,494 लोगों का टेस्ट निगेटिव आया, वहीं 936 लोगों के टेस्ट का रिजल्ट अभी प्रतीक्षा में है। पॉजिटिव पाए गए लोगों मे 9 बोकारो, 2 हज़ारीबाग़, 1 गिरिडीह, 1 कोडरमा, 1 सिमडेगा, 2 धनबाद एवं 18 राँची के हैं। कोरोना से बचाव के लिए राज्य में 4,062 क्वॉरेंटाइन सेंटर कार्य कर रहे हैं, जिसमें 8,855 लोगों को क्वॉरेंटाइन किया जा रहा है, वहीं 97,418 लोग होम क्वॉरेंटाइन में रह रहे हैं । अभी तक 1,19,000 लोगों ने अपना क्वॉरेंटाइन पूरा कर लिया है।

ऐसी स्थिति में गृह मंत्रालय भारत सरकार द्वारा जारी निर्देश के आलोक में झारखंड के मुख्य सचिव सुखदेव सिंह ने राज्य के सभी सरकारी विभागों के प्रमुख, प्रमंडलीय आयुक्त एवं उपायुक्तों को निर्देश दिया है कि नोवल कोरोना वायरस के प्रसार को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार के ऑटोनॉमस बॉडी एवं लोकल गवर्नमेंट के कार्यालयों को 20 अप्रैल को प्रभाव से कुछ प्रतिबंधों के साथ खोल दिया जाए।

ग्रुप C और उनके नीचे के कर्मचारियों की कार्यालय में 33% तक उपस्थिति सुनिश्चित कराएं

मुख्य सचिव ने निर्देश दिया है कि पुलिस, होमगार्ड, सिविल डिफेंस, अग्नी एवं आपातकालीन सेवा, आपदा प्रबंधन, कारा एवं मुंसिपल सर्विस इनकी सेवाएं बिना किसी प्रतिबंध के लॉक डाउन के पूर्व की तरह जारी रहेंगी। इनके अलावे राज्य सरकार के विभिन्न विभाग के ग्रुप A एवं ग्रुप B के पदाधिकारी आवश्यकता अनुसार कार्यालय में उपस्थित रहेंगे। वहीं ग्रुप C और उनके नीचे के कर्मचारियों की कार्यालयों में 33% तक उपस्थिति सुनिश्चित करायी जाए।

कार्यालय में सोशल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करें

मुख्य सचिव ने सभी कार्यालय प्रधान को पदाधिकारी/ कर्मचारी की ड्यूटी रोस्टर बनाते हुए 20 अप्रैल 2020 से उपस्थिति सुनिश्चित करने का निदेश दिया। उन्होंने कहा कि ड्यूटी रोस्टर बनाते समय इस बात को ध्यान में रखेंगे कि उनके कार्यालय के प्रत्येक कमरे का साइज क्या है तथा सोशल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का पालन सुनिश्चित करने हेतु उसमें अधिकतम कितने पदाधिकारी/ कर्मचारी बैठ सकते हैं। उन्होंने चतुर्थवर्गीय कर्मियों का ड्यूटी रोस्टर बनाते समय यह ध्यान में रखने को कहा कि कार्यालय के कोरिडोर में सोशल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का उल्लंघन नहीं हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि सभी पदाधिकारी कर्मी फेस मास्क पहने, कार्यालय के प्रवेश द्वार पर सैनिटाइजर तथा यथासंभव थर्मल गन की व्यवस्था रखी जाए। कार्यालय की ऊपरी मंजिल पर जाने के लिए सीढ़ियों का उपयोग करने के लिए पदाधिकारी/ कर्मचारियों को प्रेरित किया जाए। कार्यालयों में आगंतुकों के प्रवेश को रोका जाए। अति आवश्यक बैठकों का आयोजन अगर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग अथवा अन्य इंटरनेट प्लेटफार्म के माध्यम से संभव हो तो उतने ही पदाधिकारियों को बैठक में आमंत्रित किया जाए जिन्हें सोशल डिस्टेंसिंग के सिद्धांत का पालन करते हुए सभागार में बैठना संभव हो। कार्यालय परिसर में गुटखा तंबाकू खाकर थूकने की प्रवृत्ति को रोका जाए ।

बता दें कि राज्य सरकार के इस निर्देश को राज्य के सभी जिलों के जिलाधिकारियों को भेजकर 20 अप्रैल से कृषि तथा उद्योग क्षेत्र को लॉक डाउन से मुक्त किए जाने की घोषणा की गई है ताकि अर्थव्यवस्था को बेहतर करने की पहल की जा सके। साथ ही उद्योग तथा कृषि के माध्यम से आम लोगों की जरूरत की चीजें भी बाजार में उपलब्ध करायी जा सके।

इस बावत बताया गया है कि कृषि तथा उद्योग संचालन में सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन अनिवार्य रूप से संबंधित संस्थाओं को करना होगा अन्यथा उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जो भी उद्योग आगामी 20 अप्रैल से खुलेंगे उनमें मजदूरों की उपस्थिति उसी उद्योग के पास के क्षेत्रों के होंगे जो 1 किलोमीटर की दायरे में होंगे। बाहर से किसी भी मजदूर या कर्मी को उद्योग तथा कारखानों को चलाने हेतु अनुमति नहीं दी जाएगी। सोशल डिस्टेंसिंग का अनुपालन करते हुए मनरेगा कार्यों को भी जारी रखा जाएगा ताकि ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को स्वरोजगार से जोड़ा जा सके।

सार्वजनिक कार्यक्रम पर पूर्ण प्रतिबंध

राज्य के तमाम अनुमंडल पदाधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जिले में किसी प्रकार की सामुदायिक सहभागिता पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगी। साथ ही शादी, विवाह, त्यौहार जैसे सामुदायिक समारोह पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेंगे, ताकि लोगों को सोशल डिस्टेंस के तहत घरों में रखा जा सके। बैंकों में तथा अन्य सार्वजनिक जगहों पर अगर कोई भी सोशल डिस्टेंसिंग का उल्लंघन करता है तो उसपर कानूनी कार्रवाई करते हुए जेल भेजने की पहल करें।

अनुमंडल पदाधिकारी तथा पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि आगामी रमजान त्यौहार को देखते हुए संबंधित समाज के प्रबुद्ध लोगो के साथ बैठक कर सोशल डिस्टेंसिंग के तहत लोगों को घरों में ही त्यौहार मनाने की अपील करें।
जिले के सभी सीमाओं पर पुलिस निगरानी रखें ताकि जिले में कोई भी बाहरी व्यक्ति प्रवेश न करें तथा जिला से कोई भी व्यक्ति बाहर ना जा सके।

कोई भी पदाधिकारी तथा कर्मी जो कोविड-19 के ड्यूटी हेतु प्रतिनियुक्त किए गए हैं, वह बाहर में किसी के द्वारा दिए गए खाना तथा भोजन को ग्रहण ना करें, संभव हो तो अपना पानी तथा अपना भोजन साथ लेकर चलें। बताया गया है कि 20 अप्रैल से मालवाहक वाहनों को लॉक डाउन से मुक्त रखा जाएगा।
20 अप्रैल से राज्य के औद्योगिक संस्थानों व ग्रामीण क्षेत्रों में चलने वाले उद्योगों को नगर निगम और नगर पालिकाओं की सीमा के बाहर संचालित करने की अनुमति दे दी गई है। यह भी कहा गया है कि सभी प्रतिष्ठान जहाँ तक सम्भव हो अपने परिसर में श्रमिकों के रहने की व्यवस्था करेंगे। थर्मल स्कैनिंग अनिवार्य रूप से रखना होगा।
कहा गया है कि उद्योगों के प्रवेश द्वार सहित परिसर के सभी क्षेत्रों को पूरी तरह से अनिवार्य रूप से सैनिटाइज करना सुनिश्चित करना होगा। परिसर में प्रवेश करने वाले सभी वाहनों और मशीनरी को अनिवार्य रूप से सैनिटाइज किया जाना चाहिए।
केवल 30-40% यात्री क्षमता के साथ कम्पनी द्वारा विशेष परिवहन सुविधा से बाहर से आने वाले श्रमिकों की व्यवस्था की जाएगी।
देखना यह होगा कि सरकार के इस फैसले से राज्य को कितना फयदा होता है। क्योकि जो बड़े उद्योग हैं वे शायद सरकारी गाइड लाइन का पालन करने सफल रहें मगर मझोले व छोटे उद्योग शायद ही इनका पालन कर पाने में सक्षम हो पाएंगे।

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