कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए अत्याधुनिक अस्पताल बनाया जाए

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हम सब जानते हैं कि आज पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का तीव्रता से संक्रमण एवं लाखों लोगों की मृत्यु के कारण यह विश्वमारी (Pandemic) का रूप धारण कर लिया है। दुनिया के अधिकांश देश इस वायरस के चपेट में आकर तबाह हो रहे हैं। भारत में भी यह बीमारी तेजी से अपना पैर पसार रही है। आखिर इस जानलेवा और अत्यंत संक्रामक वायरस की उत्पत्ति कैसे हुई, भारत में इसका प्रसार कैसे हुआ, इसके रोकथाम के लिए क्या-क्या करने की आवश्यकता है एवं जनता को किन-किन मांगों को बुलंद करनी चाहिए, इन सभी बातों को जानना बेहद जरूरी है।

चीन के हुबई प्रदेश के वुहान शहर से नावेल कोरोना वायरस की उत्पत्ति दिसंबर 2019 में हुई थी। कुछ वैज्ञानिकों व विषाणुविदों (virologist) का मानना है कि इस वायरस का विकास अत्याधुनिक बायोसेफ्टी लैब 4 (संक्षेप में BSL 4 – यह एक अत्याधुनिक लैब है जहां सबसे खतरनाक सूक्ष्मजीवों का रिसर्च किया जाता है) में कृत्रिम रूप से किया गया है। इस संबंध में मतभेद मौजूद है। बहरहाल चीन के वुहान शहर से ही दुनिया के विभिन्न देशों में इस वायरस के संक्रमण का विस्तार एक मानव से दूसरे मानव में हुआ। दुनिया के विभिन्न देशों से संक्रमित लोगों का भारत में आगमन के द्वारा ही भारत इस अत्यधिक खतरनाक वायरस का शिकार हुआ। हवाई अड्डों में यदि कोरोना वायरस की स्क्रीनिंग व उसकी जांच की समुचित व्यवस्था सही समय में की जाती और विदेश से आए हुए प्रत्येक यात्रियों की कोरोना जांच की जाती तो इस वायरस से हिंदुस्तान पूर्णतः सुरक्षित रहता।

भारत में कोरोना वायरस के आगमन की खबर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 31 जनवरी 2020 को दे दी थी। किंतु भारत सरकार ने इस पर विशेष ध्यान ना देते हुए 24 फरवरी 2020 को लाखों-लाख लोगों की भीड़ लगा कर “नमस्ते ट्रंप” कार्यक्रम का आयोजन किया जिसमें दुनिया के कई देशों के लोग भी शामिल हुए थे। 23 मार्च तक भारत का संसद भवन भी खुला था। इसी दरम्यान कोरोना संक्रमित कनिका कपूर का भीड़ भरा कार्यक्रम, मध्य प्रदेश में नई सरकार का शपथ ग्रहण कार्यक्रम, राम मंदिर निर्माण के लिए सामूहिक पूजा-अर्चना, तबलीगी जमात का कार्यक्रम, तीर्थ यात्रा, शादी-विवाह आदि तमाम जमावड़े बदस्तूर जारी रहे। इस वजह से कोरोना वायरस भारत में तेजी से फैलता रहा। जब स्थिति भयावह हो गई तब भारत सरकार ने आनन-फानन में 22 मार्च 2020 को एक दिवसीय “जनता कर्फ्यू” लागू कर दी। और 24 मार्च 2020 से 21 दिनों का बिना कोई पूर्व तैयारी के पूरे देश को लॉक डाउन कर दी। पब्लिक यातायात के तमाम साधनों को प्रतिबंधित कर दिया गया। इस वजह से विभिन्न शहरों में करोड़ों की तादाद में प्रवासी मजदूर, छात्र आदि बुरी तरह से फंस गए। सरकार ने लॉक डाउन के दरम्यान सीमित लोगों को राशन, गैस व पैसे देने की घोषणा तो जरूर कर दी लेकिन जनता को “प्यासे को ओस चटाने” वाली मदद भी कई दिनों के बाद मिलनी शुरू हुई। यहां बताना आवश्यक है कि ना तो सभी दिहाड़ी मजदूर पंजीकृत हैं, ना ही सभी गरीब जनता का राशन कार्ड ही बना है और ना ही सभी आम जनता के पास उज्जवला गैस कनेक्शन है। इस वजह से यह अत्यल्प सरकारी राहत भी उन तक नहीं पहुंच पाई है। अब तो 21 दिनों के लॉक डाउन के बाद पुनः 19 दिनों का लॉक डाउन घोषित किया जा चुका है। प्रवासी मजदूर रोजगार विहीन होकर दाने-दाने के लिए मोहताज हो गए। शहरों में पढ़ने वाले छात्रों की हालत भी खराब हो गई। इस वजह से पैदल ही उन्हें घर के लिए निकलना पड़ा। सैकड़ों मजदूर पैदल यात्रा में भूखे प्यासे अपने प्राण तक गंवा बैठे।

दोस्तों, लॉक डाउन का एक महीना पूरा होने जा रहा है। लेकिन इस एक महीने के दौरान भारत सरकार ने इस अत्यंत खतरनाक महामारी से निपटने के लिए ना तो कोई अत्याधुनिक अस्पताल खोले हैं, ना ही अतिरिक्त डॉक्टर, नर्स की बहाली किए हैं, ना ही पर्याप्त संख्या में कोरोना वायरस की जांच कर रही है और ना ही स्वास्थ्य कर्मियों को N 95 मास्क, सैनिटाइजर, PPE (Personal Protective Equipment) किट, वेंटिलेटर आदि जरूरी चीजों को उपलब्ध कराई है। व्यापक संख्या में कोरोना जांच कर, रोगियों को पृथक कर, इलाज किए बगैर इस अत्यंत महामारी का रोकथाम संभव नहीं है। लेकिन जनस्वास्थ्य के लिए सरकार का रवैया बिल्कुल ही उदासीन है। जहाँ रक्षा बजट में केंद्रीय सरकार अपने कुल खर्च का 15.49% खर्च करती है वहीं जनस्वास्थ्य के लिए मात्र 5.3% ही खर्च करती है। यही स्थिति लगभग दुनिया के सभी देशों की है। इससे साफ जाहिर होता है कि पूंजीवादी देशें युद्ध के लिए अथाह धनराशि खर्च करती है लेकिन जनता को स्वस्थ्य रखने के लिए पर्याप्त धनराशि आवंटित नहीं करती है।

आज देश में यदि पूरा वर्ष अनाज का उत्पादन ठप भी रहे तो भी पूरे देश के सरकारी गोदामों में इतनी मात्रा में अनाज के भंडार मौजूद हैं कि 130 करोड़ आबादी को पूरे वर्ष तक आसानी से भोजन उपलब्ध कराया जा सकता है।

सरकार की आय जनता से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर (tax) से ही होती है जिसका पूर्ण प्रयोग जनकल्याण के लिए होना चाहिए। अतः बेहतर शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य एवं आपदा की घड़ी में पर्याप्त मात्रा में भोजन एवं तमाम आवश्यक चीजों को प्राप्त करना हमारा अधिकार है। अतः हम जनता की निम्नलिखित मांगों को बुलंद करते हैं :-

1. लॉक डाउन अवधि एवं लॉक डाउन के हटने के 3 महीने बाद तक के लिए पर्याप्त मात्रा में सभी जनता को भोजन, मास्क, सैनिटाइजर आदि तमाम जरूरी चीजों को निशुल्क एवं अतिशीघ्र प्रदान किए जाएं।

2. विभिन्न शहरों में फंसे प्रवासी मजदूरों व छात्र-छात्राओं को रहने, खाने-पीने की समुचित व्यवस्था की जाए। घर आने के इच्छुक मजदूरों व छात्र-छात्राओं का कोरोना जांच कर उन्हें सेनिटाइज किए हुए ट्रेनों और बसों से घर पहुंचाया जाए।

3. कोरोना जंग में शामिल डॉक्टर, नर्स सहित तमाम स्वास्थ्य कर्मियों, सफाई कर्मियों, पुलिसकर्मियों आदि वीरों को N 95 मास्क, PPE किट, सैनिटाइजर आदि प्रदान किए जाएं।

4. सभी सरकारी अस्पतालों में कोरोना की निशुल्क जांच की व्यवस्था की जाए एवं जिला अस्पतालों तथा मेडिकल कॉलेजों में वेंटिलेटर पर्याप्त संख्या में उपलब्ध किए जाएं।

5. कोरोना वायरस का मुकाबला करने के लिए अत्याधुनिक अस्पताल बनाया जाए।

6. प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके डॉक्टर एवं मेडिकल स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण देकर अविलंब स्वास्थ्य क्षेत्र में बहाल किया जाए।

7. दवाई व टीका के अनुसंधान में पर्याप्त मात्रा में धनराशि आवंटित की जाए।

8. लॉक डाउन अवधि में निजी कंपनियों में कार्यरत मजदूर-कर्मचारियों के वेतन में कोई कटौती न की जाए।

9. लॉक डाउन हटने के बाद सभी मजदूर-कर्मचारियों को काम पर वापस लेना होगा।

10. लॉक डाउन हटने के बाद बाधित पढ़ाई-लिखाई की क्षतिपूर्ति के लिए – अतिरिक्त क्लास के लिए अतिरिक्त शिक्षक एवं अध्ययन सामग्रियों की व्यवस्था की जाए
पावेल

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