कोरोना के जयचन्द

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संतोष कुमार
विदेशी हमलों की एक लम्बी परम्परा हमारे देश में पायी जाती है। हम हारते हुए देशी राजाओं की बहादुरी, विदेशी आक्रान्ताओं की क्रूरता और विश्वासघातियों की लम्बी परम्परा को पढ़कर बड़े हुए हैं। हमारा हारने वाला राजा प्रायः बहादुर होता था जो जयचन्दों, मीरजाफरांे के कारण लड़ाई हार जाता था।
आज जब वि देशी कोरोना के हमले से भारत भूमि आक्रान्त है तो मुझे लगा कि हमारा बहादुर राजा हार न जाय इसलिए मीरजाफर और जयचन्दों का पता लगाया जाय।
इस कड़ी में पहला नाम राहुल गांधी का आता है। चूंकि राहुल गांधी को सत्ताधारी दल गंभीरता से नही लेता है इसलिए उनको कोरोना के संक्रमण के सम्बन्ध में प्रधानमंत्री का कीमती ध्यान बार-बार आकर्षित नही करना चाहिए था। कोरोना के सम्बन्ध में उनके द्वारा ध्यान आकर्षित करने का दुष्परिणाम यह हुआ कि प्रधानमंत्री जी इस समस्या की गंभीरता को समझ नही पाए।
इस कड़ी में दूसरा नाम कमलनाथ का है। यदि कमलनाथ सत्ता के मोह में न पड़कर अपना त्यागपत्र तुरन्त कमल के फूल को अर्पित कर दिए होते तो सैकड़ो विधायकों को कोरेन्टाइन में नही रहना पड़ता न ही बेचारे मध्य प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री को राजधानी छोड़कर किसी किले की शरण लेनी पड़ती और मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार बनते ही पूरी केन्द्र सरकार तत्परता से कोरोना को जड़मूल सहित उखाड़ फेंकने में लग गयी होती।
इस वि देशी हमले में मीरजाफरों की भूमिका हमारे आस पड़ोस के देश के नेताओं ने भी निभाई है। अरे भाई जब इनको मालूम है कि हमारे प्रधानमंत्री जी जबतक विदे श की किसी समस्या का समाधान नही कर लेते तबतक देश के बारे में नही सोचते हैं तो इन सार्क दे श के नेताओं को चाहिए था कि वे स्वयं ही पहल करके प्रधानमंत्री जी से मार्ग दर्शन प्राप्त कर लिए होते। अगर सार्क दे श के नेताओं ने ऐसा किया होता तो प्रधानमंत्री जी कभी अपने दे श में कोरोना समस्या का निराकरण करके अमरीका पहुंच गए होते और सांसत में फंसे ट्रम्पवां की जान छुड़ा रहे होते।
वैसे थाली बजाने वाले भी कम जिम्मेदार नही हैं अगर वे और जोरशोर से थाली बजाते हुए सड़कों पर नाचते तो शायद कोरोना अबतक पाकिस्तान पहुंच चुका होता क्योंकि मैने टी.वी. में देखा बहुत से लोग खिड़की से ही थाली बजाकर खाना पूर्ति कर लिए। जबकि उनका भी सड़क पर उतर कर नाचना गाना बनता ही था, क्या जाने कोरोनवा देश में चल रहे डांण्डिया महोत्सव को ही देखकर अपनी सुधबुध खो देता।
अन्त में सबसे गंभीर जिम्मेदारी तबलीगियों की बनती है अगर उनका मौलाना मीडिया में पहले ही पहंुच कर उल्टे सीधे बयान दिया होता और तबलीगियों को कुछ और संख्या में संक्रमित करके भेजता तो अबतक टी0वी0 चैनल वाले कुछ मस्जिदों से दो-चार जिन्दा कोरोना लाइव दिखा चुके होते या कौन जाने मुल्लों को पीछा करते मीडिया वालों की भीड़ को देखकर कोरोना भाग खड़ा होता।

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