केदारनाथ सिंह : यथार्थ और रोमांस के चितेरे

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समकालीन हिंदी कविता में केदारनाथ सिंह का स्थान अन्यतम है . इन्हें तार सप्तक का कवि माना जाता है और नयी कविता के प्रमुख कवियों में इनका नाम शामिल है . अपने काव्य संसार में अद्भुत जीवंत बिंबों और सहज सार्थक प्रतीकों के माध्यम से वर्तमान परिवेश के यथार्थ और इसकी हलचल को कविता में इन्होंने सुंदरता से अभिव्यक्त किया है और कविता में जीवन से जुड़े तमाम सवालों को लेकर प्रश्न प्रतिप्रश्न के रूप में चिंतन के महत्वपूर्ण बिंदुओं को सबके सामने रखा है . हिंदी कविता में केदारनाथ सिंह की लोकप्रियता का यह सबसे बड़ा कारण है . इन्हें स्वातंत्र्योत्तर काल की भारतीय जीवन चेतना के कवि के रूप में देखा जा सकता है और सचमुच कविता में अगर समाज में मनुष्य के जीवन की नयी लय को अगर देखना जानना हो तो केदारनाथ सिंह की कविता सबको जरूर पढनी चाहिए . इनकी कविता में मनुष्य के मन का विरल और संश्लिष्ट राग समाया हुआ है और इसका स्वर तमाम तरह की सम विषम जीवन स्थितियों में मनुष्य के मन को सदैव असीम आत्मिक सौंदर्य से अभिभूत करता है . इस प्रकार इनकी कविताओं में जीवन का सच्चा भाव प्रवाहित हुआ है . हिंदी साहित्य संसार में दीर्घकाल तक काव्य साधना में सक्रिय रहे केदारनाथ सिंह के कविता संग्रहों में ‘यहाँ से देखो ‘ , ‘ जमीन पक रही है ‘ और ‘ अकाल में सारस ‘ महत्त्वपूर्ण है . इन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से भी अलंकृत किया गया और लंबे अर्से तक नयी दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंदी साहित्य के प्रोफेसर के रूप में भी ये कार्यरत रहे . इनके काव्य की भाषा और उसकी संवेदना पर पूर्वी उत्तर प्रदेश की भोजपुरी संस्कृति का गहरा असर दिखायी देता है और इनकी काव्य चेतना का आधुनिक तानाबाना इस जनपद के लोकतत्वों से मूलत: निर्मित हुआ है और स्वातंत्र्योत्तर भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त स्पंदन इनके काव्य का प्रमुख स्वर माना जाता है
केदारनाथ सिंह के अन्य कविता संग्रहों में ‘ उत्तर कबीर ‘ और ‘ बाघ ‘का उल्लेख भी किया जा सकता है . इसके अलावा आधुनिक हिंदी कविता के कलात्मक सरोकारों पर लिखी इनकी आलोचनात्मक पुस्तक भी पठनीय है . बेहद विनम्र और हँसमुख केदारनाथ सिंह सदैव सबसे आदर पाते रहे और सबको अपना स्नेह प्रदान करते रहे राजीव कुमार झा . . . व्हाटस अप 8102180299

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