कुमार मुकुल की कविताः कोरोना ‘काल’

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समय को निगलता कोरोना
निकट आता जा रहा
कितनी तेजी से
बीत रहे दिन

तीन हप्ते और
22 -24 लाख मरीज
दिन बीत रहे कि बीत रहे लोग

ध्रुव था दुनिया में शेष जो
अमेरिका अमेरिका न्यूयॉर्क
शीर्ष पर है अब भी वो ही अमेरिका

लोग मरे जा रहे पट पट पट
कोशिशें जारी हैं फिर भी
लाइव आना चाहते सब के सब

गांधी और बुद्ध भी
नहीं कर सके जो
कर रहा कोरोना
बकरों और मुर्गियों की अम्मा
खैर मना रहीं।

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