कश्मीर में इंटरनेटबंदी कोरोनावायरस महामारी के दौरान घातक हो सकती है

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रिपोर्टर्स विदआऊट बॉर्डर्स ने भारत सरकार से तुरंत कश्मीर घाटी में, जहां संचार पर लागू पाबंदियां कोविड19 महामारी को देखते हुए घातक सिद्ध हो सकती हैं, तेज़ रफ्तार (4जी) इंटरनेट शुरू करने की मांग की है।

इस सप्ताह के मध्य में सोशल मीडिया पर ऐसी अफवाहें थीं कि तेज रफ्तार इंटरनेट जम्मू एवं कश्मीर में बहाल की जा रही है, पर भारतीय गृह मंत्रालय ने 25 मार्च को इन अफवाहों का खंडन किया। गृह राज्य मंत्री गंगापुरम किशन रेडी ने सीधे इतना ही कहा, “विषय पर चर्चा जारी है।“

जम्मू एवं कश्मीर प्रशासन की तरफ से कल प्रकाशित एक नोट ने उम्मीदों पर निश्चित रूप से पानी फेर दिया। नोट जो आरएसएफ ने देखा है, पुष्टि करता है कि मोबाईल फोन इंटरनेट सीमित से सेकंड जनरेशन (2जी) ही जारी रहेगी और प्रीपेड कनेक्शन जो कि तीन चौथाई लोग इस्तेमाल करते हैं, वह प्रतिबंधित ही रहेंगे। इंटरनेट कनेक्शन एमएसी-बाइडिंग (मीडिया एक्सेस कंट्रोल-बंधन) से नियंत्रित रहेंगे।

आरएसएफ के एशिया पैसिफिक डेस्क प्रमुख डैनियल बस्टार्ड ने कहा, “कल्पना कीजिये एक क्षेत्र की आबादी कोरोनावायरस लॉकडाऊन में इंटरनेट के जरिये संवाद नहीं कर सकती। यह क्रूर सच्चाई है जो कश्मीर घाटी के पत्रकारों समेत नागरिकों पर लादी गई है।“

“आपराधिक गैरजिम्मेदारी“

बस्टार्ड कहते हैं, “जब दुनिया भर में लॉकडाऊन में लोग कार्य के लिए, संचार के लिए और जानकारी प्राप्त करने के लिए इंटरनेट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो अस्सी लाख कश्मीरी महामारी रोकने के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त करने से वंचित हैं। चूंकि यह संभावित अपराधिक गैरजिम्मेदारी दर्शाता है, नई दिल्ली को तुरंत कश्मीर घाटी में तेज रफ्तार इंटरनेट बहाल करनी चाहिए।

कश्मीर के कई पत्रकारों ने आरएसएफ से जोखिमों की पुष्टि की है। जम्मू कश्मीर के सबसे पुराने अंग्रेजी दैनिक कश्मीर टाइम्स की कार्यकारी संपादक अनुराधा भसीन जमवाल ने कहा, “संचारबंदी लोगों, खासकर पत्रकारों को अपने कार्यालयों में अथवा सरकार-संचालित मीडिया फैसीलीटेशन सेंटर में काम करने व महामारी से खुद को जोखिम में डालने पर मजबूर कर रही है।“

भारतीय व अंतर्राष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए फ्रीलांसिग करने वाली पत्रकार माजिद हैदरी कहती हैं, “कश्मीरियों को तेज रफ्तार इंटरनेट से वंचित करना कोरोनावायरस का पक्ष लेने जैसा है क्योंकि न सिर्फ ‘घर से कार्य करना‘ कश्मीरी लोगों के लिए कोई विकल्प नहीं है बल्कि लोग विश्व स्वास्थ्य संगठन के कोरोनावायरस जागरूकता के वीडियो क्लिप भी नहीं देख सकते“

पत्रकार कहते हैं कि सार्वजनिक स्वास्थ्य जानकारी के प्रसार की उनकी अहम भूमिका की क्षमता बाधित हुई है। स्वतंत्र पत्रकार आरिफ शफी ने आरएसएफ को बताया कि किसी भी संकट के समय संचार पूरी तरह से मूलभूत है।

“इतिहास का एक सबसे काला अध्याय“

लेखक और राजनीतिक टिप्पणीकार गौहर जीलानी ने हालात को ‘मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन‘ करार देते हुए कहा, “जब पूरी दुनिया कोविड19 महामारी के कारण लॉकडाऊन में है और स्वास्थ्य पेशेवर घरों में जागरूकता वीडियो व फिल्में देखने की सलाह देते हैं, जम्मू कश्मीर सरकार ने कश्मीर में इंटरनेट पर पाबंदी का एक और आदेश घोषित किया। अधिकारी इतिहास का एक सबसे काला अध्याय लिख रहे हैं।

पिछले साल पांच अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने जब जम्मू कश्मीर से इसकी पारंपारिक स्वायत्तता छीनी थी, यह उत्तरी क्षेत्र समूची दुनिया से कट गया था और फिक्स्ड लाइन व मोबाईल इंटरनेट से वंचित किया गया था।

संचारबंदी के सौवें दिन आरएसएफ ने वीडियो इंटरव्यू की एक श्रृंखला जारी की थी जिसमें कश्मीर के पत्रकारों ने उन खराब परिस्थितियों के बारे में बताया था जिनमें मीडिया कश्मीर में काम कर रहा था।

जनवरी के अंत में भारत सरकार ने 2जी मोबाईल इंटरनेट बहाल की जो उपयोगकर्ताओं को एसएमएस संदेश भेजने और प्राप्त करने की अनुमति देती है पर उससे ज्यादा कुछ नहीं। पांच मार्च को धीमी रफ्तार फिक्स्ड लाइन इंटरनेट बहाल की गई पर एमएसी-बाइंडिंग लागू है जिससे पेज बहुत धीमी गति से लोड होते हैं।

संचार पर इन प्रमुख बंदिशों के अलावा सुरक्षा बल कश्मीरी पत्रकारों को फील्ड में रोकते हैं, धमकाने से लेकर, उनके फोन छीनने और उनके स्रोतों की गोपनीयता का उल्लंघन करते हैं जैसा कि मार्च में आरएसएफ ने बताया था।

पुलिस हिंसा
भारत सरकार ने 23 मार्च को एक सौ तीस करोड़ नागरिकों पर लॉकडाऊन लागू किया। उसी दिन कम से कम दो पत्रकार अपना कार्य करते समय पुलिस की हिंसा का शिकार बने।

आज तक टीवी के संवाददाता नवीन कुमार को डेढ़ बजे के करीब नोएडा स्थित कार्यालय जाते समय घेरा गया और तीन पुलिस अधिकारियों ने उसे बुरी तरह मारा। उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “एक ने मेरा मुंह दबाया ताकि मैं चीख नहीं सकूं। मैं बहुत डर गया था।“

द हिंदू के रिपोर्टर रवि रेड्डी को दक्षिणी शहर हैदराबाद में पुलिस अधिकारियों ने करीब रात साढ़े दस बजे घेरा। उन पर कर्फ्यू का पालन न करने का आरोप लगाया गया जबकि वह लॉकडाऊन कवर करने के बाद घर लौट रहे थे।

भारत इस समय आरएसएफ की वर्ल्ड प्रेस फ्रीडम इंडेक्स में 180 देशों में 140वें नंबर पर है।

अनुवाद : कश्मीर खबर

https://rsf.org/en/news/india-kashmirs-blocked-internet-could-be-deadly-during-coronavirus-pandemic?fbclid=IwAR1hqEm6u9GeJaSsD3PP62B_DNuWschJjKL93LonH3PlcruVR-0hi3bCslU

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