एक कमरे में रहते हैं कई मज़दूर तो दूरी कैसे बनाएं?

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कर्फ्यू हमारे लिए कोरोना वायरस से भी बड़ी महामारी बन गया है!

मेरा नाम शिवम है। मेरे परिवार में मेरी माँ, मेरी बड़ी बहन और एक छोटा भाई है। इन दिनों, कोरोना वायरस के चलते हमारे जीवन में हुए बदलाव के बारे में बताता हूँ। कोरोना वायरस के डर के बाद दुकानों पर हर सामान महँगा हो गया है और कर्फ्यू लगने से मेरी मम्मी अपने काम पर नहीं जा सकती है। हमारे घर में सिर्फ मेरी मम्मी ही काम करती है, हम तीन भाई-बहन पढ़ाई करते हैं। मम्मीम का काम बंद होने से हमारे घर में पैसे की कमी हो रही है। हम अपने घर का राशन नहीं भरा सकते हैं और न ही सरकार से हमें कोई पैसे, राशन, दवाइयों की कोई मदद ही मिल रही है। मेरी मम्मी भी बीमार रहती है। मेरी ढाई साल से लगातार दवाई चल रही है जो कि मेरे लिए बुहत जरूरी है। हम घर से बाहर खाने-पीने का सामान लेने के लिए भी नहीं जा सकते हैं। और दुकानों के बंद होने से भी हमें सामान नहीं मिल पा रहा है। मुझे डर लगता है कि कहीं मेरे घर का राशन या सिलेंडर ही ना खत्म हो जाए। नहीं तो हम खाएंगे क्या और सामान कहाँ से लाएँगे। हमारे आस-पास भी मज़दूर लोग रहते हैं। सभी काम पर नहीं जा रहे हैं। सभी के घरों में दिक्कत है, लोग परेशान और डरे हुए हैं। हमारे घरों में गंदा पानी आने और इस्तेमाल होने से मेरी मम्मी और आस-पास रहने वालों को काफी लंबे समय से पेट दर्द की बीमारी है।

मीडिया में इस तरीके से दिखाया जा रहा है, जैसे कोरोना वायरस की अब तक सारी दिक्कत का कारण हम ही हैं, कि हमारे ही बचाव और कोरोना खत्म करने के लिए कर्फ्यू लागू किया गया है। इससे टैंपू चालक, सब्‍जी, फल बेचने वाले मज़दूर, राज मिस्त्री लोग जो रोज कमाते और रोज खाते हैं। भूखे मरने पर मज़बूर हैं। कर्फ्यू हम सबके लिए कोरोना वायरस से भी बड़ी महामारी है। हमारी जरूरत का सरकार को कोई ध्यान नहीं।
हम मज़दूर दूसरे राज्यों से काम करने के लिए यहाँ आए हैं, लेकिन इस कर्फ्यू के कारण हमारी परेशानी बहुत बढ़ गई है। कमरे का किराया कैसे देंगे, राशन, बिजली का बिल व दवाई के लिए पैसा कहाँ से आएगा और सबसे बड़ी परेशानी यह है कि ट्रेनों के बंद होने के कारण हम अपने घरों को भी नहीं लौट सकते। यहाँ बेहड़ों में किराए के छोटे-छोटे कमरों में सटकर रहते हैं। मेरे कमरे में हम सभी पलंग पर नहीं सो सकते, क्योंकि जगह की कमी है। बेहड़े में सभी किराएदार एक ही बाथरूम, टायलट और नलका इस्तेमाल करते हैं। सभी मज़दूर बेहड़ों के यही हाल हैं, तो हम शारीरिक दूरी कैसे बनाएँ?

मेरी सरकार से गुजारिश है कि अगर सही मायनों में सरकार हम आम गरीब लोगों के बारे में सोचती है, तो हम सब लोगों के मुफ्त टेस्ट करे, कोरोना के रोगी की सरकारी या प्राइवेट अस्पताल में फ्री इलाज की गारंटी करे, इस कर्फ्यू के कारण रोज़गार बंद रहने तक सरकार हमारी सारी जरूरतें पूरी करे।
– शिवम, मुक्तिमार्ग से साभार

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