आदिवासी पुनर्जागरण अभियान का दौरा – सालखन

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रांची : पूर्व सांसद व आदिवासी सेंगेल अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सालखन मुर्मू ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर बताया है कि सरना धर्म कोड जनसभाओं के द्वारा झारखंड, बंगाल, बिहार, उड़ीसा, असम में आदिवासी सेंगेल अभियान ( असा ) द्वारा व्यापक आदिवासी पुनर्जागरण का दौर चालू है। जिसके माध्यम से संदेश दिया जा रहा है कि आदिवासी समाज किसी भी पार्टी और नेता से बड़ा है और समाज तभी बचेगा, जब उसका हासा (भूमि ), भाषा, जाति (एसटी), धर्म ( सरना ), इज्जत, आबादी, रोजगार, चास- वास (किसानी), और संवैधानिक अधिकार बचेगा।

अनेक आदिवासी सामाजिक संगठन और आदिवासी राजनेता ( एमएलए, एमपी आदि) केवल निजी स्वार्थ हेतु आदिवासी समाज के साथ छल कर रहे हैं। तभी तो आदिवासी समाज में अबतक नशापान, अंधविश्वास, ईर्ष्या द्वेष, वोट खरीद- बिक्री और राज़तांत्रिक आदिवासी स्वशासन व्यवस्था कायम है। अधिकांश आदिवासी सामाजिक संगठन अपनी संकीर्ण सोच और निजी स्वार्थ के कारण पार्टियों और नेताओं का दलाली करते हैं, समाज का भला नहीं।

सभी 5 प्रदेशों और नेपाल, भूटान, बांग्लादेश आदि के संताल आदिवासी भी अब अमूलचूल परिवर्तन की खोज में असा को सहयोग के लिए तैयार हैं। असा को छोड़कर बाकी अधिकांश आदिवासी सामाजिक – राजनीतिक संगठन पुनर्जागरण और सकारात्मक परिवर्तन की जगह आदिवासी समाज को परंपरा के नाम पर अंधेरे में कैद कर रखने का काम कर रहे हैं।

सरना धर्म कोड आंदोलन के समर्थक आदिवासी स्वशासन प्रमुखों को 15 फरवरी 21 को असा द्वारा सम्मानित किया जाएगा। मगर जो सहयोग के बदले चुप हैं, उनका पुतला दहन भी 15 फरवरी 21 को सर्वत्र किया जाएगा। उसी प्रकार 21 फरवरी 2021 को अंतर्राष्ट्रीय भाषा दिवस ( यूएन) के अवसर पर हेमंत सोरेन सरकार का 5 प्रदेशों में पुतला दहन होगा। क्योंकि इसने भारत सरकार और झारखंड राज्यपाल के निर्देशों का अवहेलना करते हुए अब तक हिंदी के साथ संताली को झारखंड की प्रथम राजभाषा बनाने का काम नहीं किया है। आदिवासी सलाहकार परिषद ( टीएसी) का गठन भी नहीं किया है।

सालखन मुर्मू और सुमित्रा मुर्मू का बंगाल के उत्तर 24 परगना जिला में 7 फरवरी को पूर्वी वर्धमान जिला में, 8 फरवरी को हुगली जिला में 9 फरवरी को सरना धर्म कोड जन जागरण दौरा काफी सफल रहा। झारखंड के बोकारो जिले में 11/ 12/ 13 फरवरी को 4 सरना धर्म कोड जनसभाओं का आयोजन है। जिसमें 11 फरवरी 21 को वीर शहीद तिलका मांझी का जयंती समारोह बोकारो जिला के तुपकाडीह , चास प्रखंड में आयोजित होगा। तत्पश्चात ओड़िशा के राउलकेला शहर में रविवार 14 फरवरी को फिर अगला दौरा बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिला में 19 फरवरी को, झाड़ग्राम जिला में 20 और 21 फरवरी को, बिहार के कटिहार जिला में 25 फरवरी को, बंगाल के उत्तर दिनाजपुर जिला के इस्लामपुर में 26 फरवरी को और इटाहार में 27 फरवरी को तय है। 28 फरवरी को बंगाल के मालदा शहर में नौकरी पेशा में शामिल आदिवासियों की बैठक का आयोजन भी होना है। बंगाल के बीरभूम जिला में दो स्थानों पर 6 और 7 मार्च 21 को सरना धर्म कोड जनसभा आयोजित होगा। सालखन मुर्मू और सुमित्रा मुर्मू सभी जनसभाओं को संबोधित करेंगे।

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