आइसोलेशन और क्वारंटाइन क्या होते हैं?

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आइसोलेशन :- इसका मतलब है किसी बीमार व्यक्ति, जिसे कोई संक्रामक रोग है, को उन लोगों से अलग रखना जो स्वस्थ हैं। यह तब तक किया जाता है जब तक यह व्यक्ति पूरी तरह से ठीक न हो जाए। आइसोलेशन बीमार व्यक्ति के आवागमन को सीमित कर देता है ताकि बीमारी का फैलाव रोका जा सके।

क्वारंटाइन : – किसी ऐसे स्वस्थ व्यक्ति, जिस पर किसी संक्रामक रोग के सम्पर्क में आने का संदेह हो, को अलग करने व उसके आवागमन को सीमित करने के लिए क्वारंटाइन का प्रयोग होता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि वह व्यक्ति बीमार तो नहीं है। ऐसा उस संक्रामक रोग के इन्क्यूबेशन पीरियड के जितने समय तक किया जाता है। ताकि यह व्यक्ति अगर बीमार है तो दूसरों को संक्रमित न कर सके और इसका खुद का इलाज किया जा सके।
साबुन पानी से हाथ क्यों धोएं? इसका क्या प्रभाव होता है?

अगर आप साबुन और पानी से 15 सेकंड तक हाथ धोते हैं यह आपके हाथों पर मौजूद 90 प्रतिशत बैक्टीरिया को हटा देता है। अगर आप यह समय 15 सेकंड और बढ़ा दें तो यह 99.9 फीसदी बैक्टीरिया को कम कर देगा। ठंडा या कोसा पानी इस्तेमाल करें, ज्यादा गर्म पानी एक तो आपके हाथों की त्वचा को खराब करता है और दूसरा गर्म पानी में आप पर्याप्त देर तक हाथ धोते भी नहीं।
अब दूसरी बात। साबुन और पानी कीटाणुओं पर असर कैसे करते हैं? क्या ये उन्हें मार देते हैं? नहीं। ये हाथों से कीटाणुओं को धो कर हटा देते हैं। जैसे साबुन मैल को हटाता है वैसे ही जर्म्स को भी हटा देता है। लगातार चल रहे पानी से भी यह काम काफी हद्द तक हो जाता है लेकिन साबुन के साथ यह काम ज्यादा आसान और जल्दी हो जाता है, क्योंकि साबुन हाथों और त्वचा से गैर जरूरी पदार्थ को जल्द…
अब एक सवाल और आया कि कोरोना वायरस तो पहले से संक्रमण करता रहा है तो इसमें नया क्या है?

असल में कोरोना वायरस एक बड़ी फैमिली है जिसका नाम coronaviridae है। इसके आगे दो श्रेणियां हैं coronavirinae और torovininae. अब जो coronavirinae है उसकी आगे 4 मुख्य श्रेणियां हैं। अल्फा, बीटा, गामा और डेल्टा। इनमें से ज्यादातर जानवरों को संक्रमित करते हैं। सिर्फ एक गामा को छोड़कर, जो पक्षियों को इन्फेक्ट करता है। जानवरों को संक्रमित करने वाले कोरोना वायरसों में से इंसानों को 6 कोरोना वायरस संक्रमित करते हैं। जिनके नाम हैं
1. Human coronavirus 229 E
2. Human coronavirus NL 63
3. Human coronavirus OC 43
4. Human coronavirus HK U 1
5. SARS CoV
6. MERS CoV

और अब सातवां SARS CoV 2.

इनमें से पहले दो अल्फा ग्रुप के हैं और लास्ट के पांच बीटा ग्रुप से।

तो ये सब एक ही फैमिली के होते हुए भी एक ही वायरस नहीं हैं। इनकी अलग पहचान है और अलग गुण हैं। बीमारी के लक्षणों की गम्भीरता भी अलग है।
इस पूरे समय में आपने कुछ शब्द बार बार सुने होंगे।
कोरोना वायरस का सस्पेक्टेड (संदिग्ध) केस
कोरोना वायरस का प्रोबेबल (संभावित) केस
कोरोना वायरस का कनफर्म्ड (स्थापित) केस

ये क्या होते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसके लिए जो गाइडलाइन्स दी हैं वे मैं शेयर कर रहा हूँ।

सस्पेक्ट (संदिग्ध) केस : –

एक मरीज जिसमें acute respiratory illness यानि सांस की तीव्र बीमारी (कम से कम कोई एक श्वास रोग के लक्षण, यथा खांसी या सांस लेने में दिक्कत और इसके साथ बुखार) हो और साथ में किसी और कारण से इस क्लीनिकल प्रेजेंटेशन यानि नैदानिक प्रस्तुति की व्याख्या न की जा सकती हो और साथ में ये लक्षण पैदा होने के पहले 14 दिन के अंदर किसी ऐसे देश या स्थान या भूखंड में निवास करने या वहां की यात्रा करने की हिस्ट्री हो जहाँ यह बीमारी फैली हुई हो।

या फिर

एक व्यक्ति जिसको श्वास तंत्र की गंभीर बीमारी हो और वह ये लक्षण शुरू होने के पिछले 14 दिन के दौरान किसी कोरोना वायरस के स्थापित या सम्भावित मरीज के संपर्क में आया हो।

या फिर

एक मरीज जिसको श्वास तंत्र का गंभीर संक्रमण (बुखार और श्वास की बीमारी का कम से कम एक लक्षण जैसे खांसी या सांस फूलना) हो और उसे तत्काल अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत हो और उसकी इस स्थिति की किसी और कारण के साथ पूरी तरह से व्याख्या न की जा सकती हो।

प्रोबेबल (संभावित) केस :- कोरोना वायरस का संदिग्ध केस जिसका लैब टेस्ट अनिर्णायक रहा हो।

या फिर

ऐसा संदिग्ध केस जिसका किसी वजह से लैब टेस्ट न हो पाया हो।

कनफर्म्ड (स्थापित) केस :- लैब टेस्ट में कोरोना वायरस इन्फेक्शन पॉजिटिव पाया गया केस। भले ही बीमारी के लक्षण मौजूद हों या फिर न हों।

ये डब्लूएचओ का क्राइटिरिया है। इस पर जल्द ही एक वीडियो डालने की भी कोशिश करूंगा।
एक नई खबर चीन से आ रही है। पता नही कितनी सच है। वहां एक hantavirus का केस मिला है जिसकी मौत हो गई।
अब लोगों में इसका पैनिक फैला हुआ है।

Hantavirus चूहों में पाया जाने वाला वायरस का ग्रुप है जो कभी कभी इंसानों में भी आ जाता है। और श्वास तंत्र में संक्रमण कर देता है।

यह ज्यादातर मामलों में चूहों से ही इंसान में आता है। इंसान से इंसान में इसका ट्रांसमिशन नहीं देखने को मिलता।

हालांकि चिली व अर्जेंटीना में इस फैमिली के एक वायरस andes virus के कुछ मामले इंसान से इंसान में संक्रमण के देखे गए हैं। लेकिन ये बहुत कम मामले हैं।

चूहों के मल, मूत्र या लार को से संक्रमित किसी चीज को छूने और उसके बाद अपने मुंह या नाक को छूने से यह इंसान में संक्रमण कर सकता है।

अफवाहों से दूर रहें। पैनिक में न आएं

अभी हमारे यहां कोरोना वायरस है। कोरोना वायरस संक्रमण से बचने के लिए अपने हाथों को बार बार धोएं। मुंह आंख नाक को न छुएं। भीड़भाड़ वाली जगह न जाएं।
क्या कोरोना वायरस फ्लू करता है? क्या यह फ्लू वायरस ही है?

फ्लू यानि इन्फ्लुएंजा एक श्वास तंत्र के संक्रमण से होने वाला रोग है जिसके लिए इन्फ्लुएंजा वायरस जिम्मेदार होते हैं। इन्फ्लुएंजा वायरस Orthomyxoviridae वायरस फैमिली में आता है। ह्यूमन इन्फ्लुएंजा वायरस के 4 प्रकार हैं। A, B, C और D. इनमें से ह्यूमन इन्फ्लुएंजा वायरस A और B सीजनल फ्लू करते हैं। इन्फ्लुएंजा ए वायरस पर 2 प्रोटीन होते हैं H यानि Hemagglutinin और N यानि Neuraminidase. इन दोनों प्रोटीन्स के अलग अलग प्रकार के आधार पर इन्फ्लुएंजा ए वायरस के 198 अलग अलग सबटाइप्स हो सकते हैं। लेकिन प्रकृति में 132 ही अभी तक पहचाने गए हैं। आज के समय में जो वातावरण में घूम रहे हैं वे हैं H1N1, H3N2, H5N1.

लेकिन श्वास का संक्रमण सिर्फ यही वायरस नहीं करता। साधारण जुकाम से लेकर गंभीर न्यूमोनिया तक करने वाले अलग अलग वायरस होते हैं। सर्दी जुकाम के लिए सबसे ज्यादा जिम्मेदार 200 से ज्यादा वायरस वातावरण में घूम रहे हैं। सबसे ज्यादा कॉमन हैं राइनोवायरस जो picornaviridae फैमिली से आते हैं और 10-40 प्रतिशत तक सर्दी जुकाम के केसों के लिए जिम्मेदार होते हैं। फिर नम्बर आता है कोरोना वायरस का। इस फैमिली के वायरस 20 प्रतिशत सर्दी जुकाम के केसों के लिए जिम्मेदार होते हैं। उसके बाद RSV और पाराइन्फ्लुएंजा वायरस का नम्बर आता है जो paramyxoviridae फैमिली से आते हैं और 20 प्रतिशत केसों के लिए जिम्मेदार होते हैं। 20-30 प्रतिशत केसों के लिए जिम्मेदार वायरस अभी तक पहचाने नहीं जा सके हैं।

जो covid 19 बीमारी है वह कोरोना वायरस फैमिली के एक नोवल यानी नए वायरस से फैल रही है। इन्फ्लुएंजा वायरस से नहीं। कोरोना वायरस फैमिली के वायरस इंसानों के साथ साथ जानवरों में भी संक्रमण करते पाए गए हैं। मुर्गियों में इन वायरस की वजह से सांस का संक्रमण होता है तो गायों में ये दस्त की बीमारी करते पाए गए हैं। नोवल कोरोना वायरस भी जानवरों का वायरस है। वायरस बहुत बार स्पीशीज जम्प करते हैं यानि एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति में पहुंच जाते हैं। इस प्रक्रिया को क्रॉस स्पीशीज ट्रांसमिशन, होस्ट जम्प और इंटर स्पीशीज ट्रांसमिशन भी कहते हैं। इसका सही मैकेनिज्म तो पक्के तौर पर पता नहीं है लेकिन अनुमान है कि ऐसा तब होता है जब वायरस अपने अंदर म्युटेशन कर ले जिससे यह नई होस्ट स्पीशीज के इम्युनोलॉजिकल डिफेंस यानि प्रतिरोधक रक्षा प्रणाली से पार पा जाता है। नोवल कोरोना वायरस भी इसी तरह से किसी जानवर से इंसान में आया है। 80 फीसदी लोगों में यह भी साधारण लक्षण पैदा करता है। लेकिन 20 प्रतिशत में यह गंभीर लक्षण कर देता है जिनमें से 5 प्रतिशत में स्थिति अति गम्भीर हो सकती है।

नोवल कोरोना वायरस, राइनोवायरस और इन्फ्लुएंजा ए वायरस अलग अलग वायरस हैं। यहां तक कि इन्फ्लुएंजा ए वायरस के भी अलग अलग प्रकार हैं जिनके लक्षण साधारण से अति गम्भीर हो सकते हैं।
क्या लेमन जूस या नींबू का रस हैंड सैनिटाइजर का विकल्प हो सकता है?

पहली बात तो हैंड सैनिटाइजर खुद में एक विकल्प के तौर पर इस्तेमाल किया जाना चाहिए। हाथों को साफ रखने के मुख्य साधन के तौर पर साबुन और पानी का ही प्रयोग करें। बहुत मजबूरी में हैंड सैनिटाइजर का प्रयोग करें। दूसरा यह कि नींबू के रस में एंटी बैक्टीरियल गुण होते हैं लेकिन हैंड सैनिटाइजर के तौर पर यह कितना प्रभावी है और कोरोना वायरस पर इसका क्या प्रभाव है इसके बारे में अभी कोई शोध नहीं है सिर्फ अटकलें हैं। और सिर्फ अटकलों के आधार पर हमें यह रिस्क नहीं लेना चाहिए कि हमारे अंदर यह वायरस चला जाए और हमारे से यह दूसरों में चला जाए।
सबसे बेहतर है साबुन और पानी।
वह किसी कारणवश उपलब्ध नहीं है तो कम से कम 60 प्रतिशत अल्कोहल युक्त हैंड सैनिटाइजर।

इसके अलावा और कुछ न तो स्वास्थ्य विभाग ने अप्रूव किया है और न ही डब्लूएचओ ने।
वायरस इतना घातक इसलिए नहीं है कि इसकी मृत्यु दर बहुत ज्यादा है। मृत्यु दर तो इसकी 1-4 प्रतिशत तक ही बताई जा रही है। यह घातक इसलिए है क्योंकि जितनी तेजी से यह फैलता है उस तेजी से हमारे देश का स्वास्थ्य ढांचा इसे रोक पाने में असमर्थ है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार किसी भी देश में प्रति 1000 आबादी पर 3 हॉस्पिटल के बेड चाहिए। लेकिन हमारे देश में सिर्फ 1 बेड प्रति 1000 आबादी है। बाकी यह जरूरत भी सामान्य परिस्थितियों के लिए है। महामारी के समय तो और भी बेडों जरूरत होती है। फिर इससे संक्रमित 80 फीसदी व्यक्ति भले ही बिना किसी खास नुकसान के ठीक हो जाते हैं, लेकिन 20 फीसदी को तो सघन चिकित्सा की जरूरत पड़ती ही हम 4-5 फीसदी को तो वेंटिलेटर की भी जरूरत पड़ सकती है। लेकिन फिलहाल हमारे पास इन तो इतने सघन चिकित्सा कक्ष हैं और न ही इतने वेंटिलेटर। जिस तेजी से और जितने कम समय में यह फैलता है, उस हिसाब से लगता है कि करोड़ों लोग इसकी चपेट में आ सकते हैं जिनमें से लाखों क्या कई मिलियन लोगों को सघन चिकित्सा की जरूरत पड़ सकती है और हमारे देश की स्वास्थ्य सेवाएं एक साथ इतने लोगों को सघन चिकित्सा देने की स्थिति में नहीं हैं। नतीजा …. मुझे कहते हुए भी डर लग रहा… नतीजा बहुत भयावह होगा। न तो हमारे पास पर्याप्त लैब हैं, न सघन चिकित्सा कक्ष और न डॉक्टर्स व नर्सें। जो डॉक्टर्स नर्सें हैं वे भी कितने लोगों को एक साथ देख सकेंगे? वे भी इंसान हैं, उनकी भी सीमाएं हैं।
समस्या वायरस तो है ही। लेकिन सबसे बड़ी समस्या हमारे देश की स्वास्थ्य व्यवस्था है। यह इसलिए है क्योंकि पूरी व्यवस्था मुनाफे पर आधारित है जिसने हर चीज के साथ स्वास्थ्य को भी मुनाफे का साधन बना छोड़ा है। इसी व्यवस्था ने इस वायरस को वाइल्ड से इंसानों में प्रविष्ठ करवाया। यही व्यवस्था इसके इलाज में बाधक है।

डॉ. नवमीत नव

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